यूरोपोल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में संग्रहालयों में होने वाली चोरियां अब 'शालीनता' से हटकर हिंसक और आक्रामक होती जा रही हैं। अपराधी अब हथियारों और विस्फोटकों का उपयोग कर रहे हैं, जो कला जगत के लिए एक बड़ा खतरा है।
- यूरोपोल ने रिपोर्ट दी है कि संग्रहालयों में चोरी का तरीका अब 'चुपके से' करने के बजाय 'हिंसक हमले' में बदल गया है।
- अपराधी अब हथियारों, कुल्हाड़ियों और विस्फोटकों का उपयोग कर रहे हैं।
- चोरों का नया लक्ष्य अब केवल कलाकृतियां नहीं, बल्कि कीमती धातुएं और चीनी मूल की वस्तुएं भी हैं।
- अपराधी अब सोशल मीडिया के माध्यम से 'क्राइम-एज़-ए-सर्विस' मॉडल पर काम कर रहे हैं।
यूरोप, जो दुनिया भर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संग्रहों का घर है, वर्तमान में संग्रहालयों में होने वाली चोरी की एक नई और खतरनाक लहर का सामना कर रहा है। यूरोपोल (Europol) द्वारा 24 अगस्त को जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, कला चोरी का पारंपरिक तरीका अब पूरी तरह बदल चुका है। लंबे समय तक, संग्रहालयों की चोरी को 'सुरुचिपूर्ण' और बिना किसी हिंसा के होने वाली चोरी माना जाता था, लेकिन अब यह प्रवृत्ति अत्यंत हिंसक होती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले चोर गोपनीयता और धोखे का उपयोग करते थे, जैसे कि 2024 का वह मामला जहाँ जॉर्जियाई समूह ने असली किताबों को नकली से बदलकर चोरी की थी। लेकिन अब, अपराधी सledgehammers (मरोड़े), कुल्हाड़ियों, और विस्फोटकों का उपयोग करके सुरक्षा प्रणालियों को तोड़ रहे हैं। नीदरलैंड के ड्रेन्ट्स संग्रहालय में विस्फोटकों का उपयोग और फ्रांस के कॉग्नैक-जे आर्ट म्यूजियम में बेसबॉल बैट और कुल्हाड़ियों के साथ हमला इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह बदलाव केवल चोरी के तरीके में नहीं, बल्कि अपराधी के प्रोफाइल में भी आया है। यह सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती है क्योंकि अब अपराधी केवल कला के प्रेमी नहीं, बल्कि उच्च-लाभ वाले हिंसक अपराधी हैं जो बाजार की मांग के अनुसार काम करते हैं।
संग्रहालयों में बढ़ती हिंसा यह संकेत देती है कि अपराधी अब कला की कीमत से अधिक उसके त्वरित वित्तीय लाभ और पुनर्विक्रय की सुगमता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
पेरिस के प्रसिद्ध लूव्र संग्रहालय (Louvre Museum) में अक्टूबर 2025 में हुई चोरी इस नई प्रवृत्ति का सबसे बड़ा उदाहरण है। चोरों ने खिड़की तोड़कर और गार्डों को डराकर लगभग €88 मिलियन मूल्य के आभूषण चुरा लिए। यूरोपोल के अनुसार, चोरों का नया लक्ष्य अब कीमती धातुएं और पत्थर भी हैं, जिन्हें पिघलाकर पहचान मिटाना आसान होता है।
एक और चौंकाने वाला पहलू अपराधियों का संगठित होने का तरीका है। पारंपरिक तस्कर एक केंद्रीय नेटवर्क के तहत काम करते थे, लेकिन नए अपराधी 'एड-हॉक' आधार पर काम करते हैं। वे सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग के माध्यम से भर्ती किए जाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए और भी कठिन हो जाता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: संग्रहालयों में चोरी का तरीका कैसे बदल गया है?
उत्तर: पहले चोर चोरी को चुपचाप और बिना किसी शोर के करते थे, लेकिन अब वे हथियारों, विस्फोटकों और शारीरिक बल का उपयोग कर रहे हैं।
प्रश्न 2: नए अपराधी पुराने तस्करों से कैसे अलग हैं?
उत्तर: पुराने तस्कर संगठित समूहों का हिस्सा होते थे, जबकि नए अपराधी सोशल मीडिया के जरिए रैंडम तरीके से भर्ती किए जाते हैं।