बांग्लादेश ने चीन से जे-10 लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा की है, जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय राफेल विमानों के खिलाफ इसके प्रदर्शन को मुख्य कारण बताया गया है। यह निर्णय 2024 के राजनीतिक बदलाव के बाद ढाका की रक्षा खरीद नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।
- बांग्लादेश चीनी चेंगदू जे-10 लड़ाकू विमान खरीदेगा।
- ढाका ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय राफेल जेट के खिलाफ जे-10 के प्रदर्शन का हवाला दिया।
- यह सौदा शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की रक्षा रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
बांग्लादेश चीनी जे-10 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने इस सौदे की पुष्टि की है और इसे देश की संप्रभु रक्षा नीति का हिस्सा बताया है। ढाका ने इस खरीद के पीछे पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हवाई संघर्ष 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चीनी लड़ाकू विमान के प्रदर्शन को मुख्य कारण बताया है।
रहमान के अनुसार, "जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था, तब भारत के डसॉल्ट राफेल को मार गिराया गया था, और यह चीनी जे-10 द्वारा किया गया था। यह जानकारी अब स्थापित हो चुकी है।" उन्होंने आगे कहा कि यह विमान यूरोपीय जेट्स जैसे यूरोफाइटर टाइफून और फ्रांस के राफेल की तुलना में काफी सस्ता और अधिक किफायती है।
सरकार ने चीन के साथ इस संबंध में बातचीत पूरी कर ली है और एक मसौदा समझौता भी तैयार कर लिया गया है। यदि इस वर्ष पर्याप्त बजटीय आवंटन होता है, तो बांग्लादेश इस सौदे को इसी साल अंतिम रूप देगा, अन्यथा इसे अगले साल तक के लिए टाल दिया जाएगा। चीन का जे-10 एक सिंगल-इंजन, मल्टीरोल 4.5-पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसका निर्यात संस्करण J-10CE पाकिस्तान भी संचालित करता है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह खरीद दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। चीनी सैन्य उपकरणों को अपनाकर बांग्लादेश खुद को भारत के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र से दूर कर रहा है और बीजिंग व इस्लामाबाद के रक्षा तंत्र के करीब ला रहा है। यह निर्णय दर्शाता है कि 2024 के राजनीतिक बदलाव के बाद बांग्लादेश अपनी विदेश नीति को पूरी तरह से रीसेट कर रहा है।
"बांग्लादेश द्वारा जे-10 का अधिग्रहण केवल सैन्य आधुनिकीकरण नहीं है, बल्कि यह 2024 के बाद ढाका की रक्षा स्वायत्तता को प्रदर्शित करने वाला एक सोचा-समझा भू-राजनीतिक कदम है।"
| विशेषता | जे-10सीई (चीन) | डसॉल्ट राफेल (फ्रांस) |
|---|---|---|
| इंजन प्रकार | सिंगल-इंजन | ट्विन-इंजन |
| पीढ़ी | 4.5 पीढ़ी | 4.5 पीढ़ी |
| लागत | कम / किफायती | अत्यधिक उच्च |
हवाई युद्ध के दावों पर बात करें तो पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीन राफेल सहित छह भारतीय विमानों को मार गिराने का दावा किया था। हालांकि, भारत ने कई विमान खोने की बात स्वीकार की थी, लेकिन प्रकार और संख्या की पुष्टि नहीं की थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय विमानों को हुआ नुकसान जे-10 में लगी पीएल-15 मिसाइलों की रेंज (200 किमी) का गलत आकलन था, जिसे भारत केवल 150 किमी मान रहा था।
लड़ाकू विमानों के अलावा, बांग्लादेश अपनी सेना के आधुनिकीकरण के तहत हमलावर हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन हेलीकॉप्टर और ड्रोन भी खरीदेगा। रहमान ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 2024 में हुए तख्तापलट को बांग्लादेश की "दूसरी स्वतंत्रता" बताया और कहा कि इस बदलाव के बिना चीन से जे-10 की खरीद कभी संभव नहीं हो पाती।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बांग्लादेश ने यूरोपीय लड़ाकू विमानों के बजाय चीनी जे-10 को क्यों चुना?
उत्तर 1: बांग्लादेश ने राफेल और टाइफून की तुलना में जे-10 की कम लागत और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसके शानदार प्रदर्शन को मुख्य कारण बताया है।
प्रश्न 2: ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
उत्तर 2: ऑपरेशन सिंदूर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ एक सैन्य हवाई संघर्ष था, जिसमें पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के खिलाफ चीनी मूल के जे-10सीई विमानों का इस्तेमाल किया था।