नेपाल में आई भीषण अचानक बाढ़ के कारण मुंबई के कई प्रतिष्ठित नागरिक लापता हो गए हैं, जिनमें प्रसिद्ध पर्वतारोही डॉ. मिलिंद चितले और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले इस समूह के संपर्क टूटने से परिवारों में कोहराम मचा है।

  • नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण 178 भारतीय लापता बताए जा रहे हैं।
  • मुंबई के प्रसिद्ध पर्वतारोही डॉ. मिलिंद चितले, उनकी पत्नी और कई तीर्थयात्री लापता हैं।
  • समूह कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए 'हिल्स एंड ट्रेल्स' कंपनी के साथ निकला था।
  • लापता लोगों में प्रमुख डॉक्टर और वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं।

नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (flash floods) ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच, मुंबई से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। डॉ. मिलिंद पी. चितले, जिन्होंने चिकित्सा के पेशे को छोड़कर पहाड़ों के प्रति अपने जुनून को चुना, अब लापता बताए जा रहे हैं। डॉ. चितले केवल एक पर्वतारोही नहीं, बल्कि एडवेंचर जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं।

डॉ. चितले अपनी पत्नी जनhavi के साथ 'हिल्स एंड ट्रेल्स' नामक अपनी एडवेंचर कंपनी के माध्यम से लगभग 40 तीर्थयात्रियों के एक समूह के साथ कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। यह समूह 23 अगस्त को अपनी यात्रा शुरू कर चुका था। नेपाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 178 भारतीयों के लापता होने की सूचना है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक आने वाली बाढ़ (flash floods) की आवृत्ति बढ़ रही है, जो तीर्थयात्रियों और पर्वतारोहियों के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। डॉ. चितले जैसे अनुभवी विशेषज्ञ, जो स्वयं पर्वतारोहण सुरक्षा और बचाव कार्यों के विशेषज्ञ थे, का इस तरह लापता होना इस आपदा की भयावहता को दर्शाता है।

हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ अब केवल एक मौसम की घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बन चुकी है।

लापता लोगों की सूची में मुंबई के प्रतिष्ठित चिकित्सक भी शामिल हैं। अंधेरी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गायत्री देशपांडे और उनके पति डॉ. आनंद देशपांडे (हिंदुजा अस्पताल के हेमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख) का भी कोई सुराग नहीं मिला है। इसके अलावा, 68 वर्षीय सुनील एस. सुभेदार और 64 वर्षीय चेतना गुप्ता जैसे वरिष्ठ नागरिक भी इस आपदा की चपेट में आ गए हैं।

डॉ. मिलिंद चितले का करियर असाधारण रहा है। 1983 में ग्रांट मेडिकल कॉलेज से MBBS करने के बाद, उन्होंने पहाड़ों के प्रति अपने प्रेम के कारण चिकित्सा छोड़कर पर्वतारोहण को अपनाया। उन्होंने कंचनजंगा जैसी चोटियों पर चढ़ाई की और 1997 के एवरेस्ट अभियान के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें 2005 में 'गिरिमित्र पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया था।

लापता तीर्थयात्रियों का विवरण

नामपृष्ठभूमिस्थिति
डॉ. मिलिंद पी. चितलेदिग्गज पर्वतारोहीलापता
डॉ. गायत्री देशपांडेस्त्री रोग विशेषज्ञलापता
डॉ. आनंद देशपांडेहेमेटोलॉजिस्टलापता
सुनील एस. सुभेदारवरिष्ठ नागरिकलापता
Did You Know?: डॉ. चितले ने कंचनजंगा की 23,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर चढ़ाई की थी और वे 25 से अधिक बार कैलाश-मानसरोवर यात्रा कर चुके थे।

Frequently Asked Questions

1. लापता लोगों का समूह कहाँ जा रहा था?
यह समूह 'हिल्स एंड ट्रेल्स' कंपनी के माध्यम से कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा पर जा रहा था।

2. नेपाल में अब तक कितने भारतीय लापता हैं?
नेपाल सरकार के अनुसार, अब तक लगभग 178 भारतीयों के लापता होने की सूचना है।