यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच जारी संघर्ष ने शिक्षा व्यवस्था को दो हिस्सों में बांट दिया है, जिससे हजारों छात्रों के भविष्य और उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- यमन की शिक्षा प्रणाली हूती और सरकार के बीच दो अलग-अलग हिस्सों में बंट गई है।
- अदन स्थित सरकार ने हूती क्षेत्रों से जारी कुछ शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के प्रमाणीकरण पर रोक लगा दी है।
- 6.6 मिलियन से अधिक बच्चे यमन में स्कूल जाने से वंचित हैं।
- छात्रों को उनके शैक्षणिक वर्ष की गलतियों के लिए 'सामूहिक दंड' का सामना करना पड़ रहा है।
यमन में चल रहे लंबे समय से जारी गृहयुद्ध ने न केवल देश के भूगोल को, बल्कि इसकी शिक्षा प्रणाली को भी दो समानांतर और परस्पर विरोधी हिस्सों में विभाजित कर दिया है। सना (Sanaa) जैसे हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए अब डिग्री हासिल करना एक दुस्वप्न बनता जा रहा है। 19 वर्षीय बशर मोहम्मद जैसे हजारों छात्र, जो विदेश में पढ़ाई करने का सपना देख रहे थे, अब अपने हाई स्कूल प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
हाल ही में, अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी किया है। इस आदेश के तहत, हूती-नियंत्रित क्षेत्रों से जारी कुछ स्कूल प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण (authentication) को निलंबित कर दिया गया है। मंत्रालय का तर्क है कि उनके पास इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच करने के लिए आवश्यक आधिकारिक रिकॉर्ड तक पहुंच नहीं है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह संकट केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवीय है। जब एक छात्र का प्रमाणपत्र अमान्य हो जाता है, तो उसका वर्षों का संघर्ष और निवेश शून्य हो जाता है। यह विभाजन छात्रों को उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों से पूरी तरह काट रहा है, जिससे एक पूरी पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
शिक्षा को राजनीतिक या सैन्य प्रतिद्वंद्विता से दूर रखा जाना चाहिए; छात्रों को इस विभाजन की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
यमन में शिक्षा का यह विभाजन गहराता जा रहा है। हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में शैक्षणिक वर्ष जून में शुरू होता है, जबकि सरकार समर्थित क्षेत्रों में यह अगस्त के अंत में होता है। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने अलग-अलग पाठ्यक्रम (curricula) अपना लिए हैं। ताज़ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्रीय शोधकर्ता मोहम्मद अब्दु के अनुसार, दो अलग-अलग मंत्रालय और शून्य समन्वय के कारण समाज, विशेष रूप से छात्र, इस असंतुलन के नकारात्मक प्रभावों से नहीं बच पा रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, यमन में युद्ध के कारण लगभग 2,800 स्कूल या तो नष्ट हो चुके हैं या अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। इस वर्ष देश के लगभग एक-तिहाई स्कूली बच्चे, यानी 6.6 मिलियन से अधिक बच्चे, स्कूल से बाहर हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: छात्रों के प्रमाणपत्रों के साथ क्या समस्या है?
उत्तर: अदन स्थित सरकार के पास हूती क्षेत्रों से जारी कुछ प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए आवश्यक डेटा नहीं है, जिसके कारण उन्होंने उनके प्रमाणीकरण को निलंबित कर दिया है।
प्रश्न 2: इसका छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: छात्र विदेश में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके पास वैध और प्रमाणित दस्तावेज नहीं होंगे।