पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में इफ्तिखार अली गिलानी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है। PML-N के इस फैसले के बाद नवाज शरीफ के सत्ता पाने के सपने टूट गए हैं।
- इफ्तिखार अली गिलानी PML-N के नए प्रधानमंत्री चुने गए।
- गिलानी को 44 में से 30 विधायकों का समर्थन मिला।
- नवाज शरीफ की PoK के प्रधानमंत्री बनने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
- PoK में चुनावी हिंसा और धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुजफ्फराबाद में हुए हालिया मतदान के बाद, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के इफ्तिखार अली गिलानी को नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया है। शुक्रवार को विधानसभा में हुए मतदान में गिलानी ने कड़ा मुकाबला करते हुए 44 में से 30 वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के मुख्तार अहमद थे, जिन्हें मात्र 14 वोट मिले।
इस चुनाव परिणाम ने नवाज शरीफ की उन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को एक बड़ा झटका दिया है, जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जाहिर की थीं। नवाज शरीफ ने संकेत दिया था कि यदि PML-N की जीत होती है, तो वे शहबाज शरीफ से PoK के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने का आग्रह करेंगे। हालांकि, चूंकि नवाज शरीफ स्वयं इस विधानसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनकी यह योजना धरी की धरी रह गई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि PoK में सत्ता का यह हस्तांतरण केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ते असंतोष और अस्थिरता का संकेत भी है। गिलानी की सरकार को न केवल विपक्ष, बल्कि स्थानीय विरोध प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ेगा।
PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 का चुनाव जनता करती है और 8 सीटें आरक्षित हैं। वर्तमान में सदन में केवल 46 सदस्य ही मौजूद थे, क्योंकि पुंछ और सुधनोती जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने के कारण चुनाव नहीं हो सके। मतदान के दौरान स्पीकर ने तटस्थता बनाए रखी, जबकि पार्टी के भीतर आंतरिक कलह के कारण शाह गुलाम कादिर की अनुपस्थिति ने भी चर्चा बटोरी।
इफ्तिखार गिलानी की ताजपोशी एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में हो रही है, जहाँ जनता का आक्रोश चरम पर है।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान हिंसा और धांधली के आरोपों ने चुनावी शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीन चरणों में हुए इन चुनावों में जगह-जगह झड़पें हुईं। PML-N ने 38 सीधी सीटों में से 25 पर कब्जा किया, जबकि बिलावल भुट्टो की PPP केवल 12 सीटों तक सिमट गई। अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने भी नवाज शरीफ की पार्टी का समर्थन किया है।
क्षेत्र में मौजूदा तनाव का मुख्य कारण संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन हैं। यह संगठन आरक्षित सीटों के प्रावधान का विरोध कर रहा है, जिसके कारण जून से ही हिंसक झड़पें जारी हैं। ऐसे अशांत माहौल में गिलानी के लिए शासन चलाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।
भारत ने हमेशा स्पष्ट रुख अपनाया है कि PoK पर पाकिस्तान का कब्जा गैर-कानूनी है और यह क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। इस नई सरकार के गठन के बाद अब वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके प्रभाव पर नजर रहेगी।
Frequently Asked Questions
1. PoK के नए प्रधानमंत्री कौन हैं?
इफ्तिखार अली गिलानी, जो PML-N पार्टी से संबंधित हैं।
2. चुनाव में किस पार्टी को सबसे अधिक सीटें मिलीं?
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को सबसे अधिक जीत दर्ज करने में सफलता मिली है।