नेपाल के ऊपरी त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में आई भीषण बाढ़ के बाद हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के इंजीनियर सुखविंदर रट्टन लापता हैं। परिवार ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
- हिमाचल के ऊना निवासी इंजीनियर सुखविंदर रट्टन नेपाल में बाढ़ के बाद से लापता हैं।
- वह 216-मेगावाट ऊपरी त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में साइट इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।
- परिवार ने नेपाल और भारतीय सरकार से तत्काल सहयोग और समन्वय की अपील की है।
नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जीवन और बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। इस आपदा के बीच, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के एक 30 वर्षीय इंजीनियर, सुखविंदर रट्टन, के लापता होने की खबर ने उनके परिवार की उम्मीदों और डर को गहरा कर दिया है। सुखविंदर, जो नेपाल की 216-मेगावाट की अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में साइट इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, 26 अगस्त को आई आपदा के बाद से लापता हैं।
सुखविंदर का परिवार अब उनकी तलाश में पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। उनके बड़े भाई वरिनدر रट्टन, जो दुबई में रहते थे, तुरंत काठमांडू पहुँच गए हैं। उनके साथ चचेरे भाई शुभम भी हैं, जो नेपाल सेना के राहत केंद्र में रहकर जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि सुखविंदर ने आखिरी बार 25 अगस्त को फोन किया था और वादा किया था कि वह दिवाली मनाने भारत वापस आएंगे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते ग्लेशियर पिघलने और अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) से न केवल स्थानीय आबादी, बल्कि महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी गंभीर खतरा है। अपर त्रिशूली परियोजना, जो भारत को भी बिजली की आपूर्ति करती है, इस आपदा की चपेट में आई है, जो क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय है।
हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट बन गई है।
सुखविंदर की पत्नी, साराजीत कौर, ने बताया कि वह हमेशा उन्हें इस क्षेत्र में भूस्खलन के खतरों के प्रति सचेत करती थीं। सुखविंदर पिछले तीन वर्षों से नेपाल में काम कर रहे थे। उनके पिता, हुसन लाल रट्टन, जो एक सेवानिवृत्त CISF कर्मी हैं, इस कठिन समय में अपने बेटे की वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर, ऊना के अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल ने पुष्टि की है कि मामले की जानकारी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और गृह मंत्रालय को दे दी गई है। भारत सरकार नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर रही है ताकि लापता व्यक्तियों का पता लगाया जा सके। वर्तमान में, प्रभावित क्षेत्र नेपाल सेना के नियंत्रण में है, जिससे बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Historical Background
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का टूटना और उसके बाद आने वाली बाढ़ एक बार-बार होने वाली घटना बन गई है। पिछले कुछ दशकों में, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के अस्थिर होने की दर बढ़ी है, जिससे ऊपरी त्रिशूली जैसे महत्वपूर्ण जलविद्युत क्षेत्रों में जोखिम बढ़ गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सुखविंदर रट्टन कहाँ लापता हुए हैं?
उत्तर: वह नेपाल में 216-मेगावाट की अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना स्थल पर लापता हुए हैं।
प्रश्न 2: क्या सरकार इस मामले में मदद कर रही है?
उत्तर: हाँ, ऊना प्रशासन और केंद्र सरकार नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर रही है।