प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। यह दौरा भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति और सुरक्षा, ऊर्जा एवं कनेक्टिविटी के लक्ष्यों को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान (SCO शिखर सम्मेलन) का दौरा करेंगे।
  • मध्य एशिया भारत के लिए सुरक्षा, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के लिहाज से 'विस्तारित पड़ोस' है।
  • चीन के बढ़ते प्रभाव और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारत की उपस्थिति रणनीतिक रूप से अहम है।
  • यूरेनियम, प्राकृतिक गैस और सोने जैसे समृद्ध खनिज संसाधनों तक पहुंच बनाना मुख्य लक्ष्य है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी मध्य एशिया दौरा भारत की विदेश नीति के एक नए अध्याय का संकेत है। वे 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और उसके बाद 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

भारत ने 2012 में अपनी 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के माध्यम से इस क्षेत्र के साथ संबंधों को नया रूप दिया। 2015 में पीएम मोदी की पांचों मध्य एशियाई देशों की यात्रा ने इस नीति को नई गति दी। आज, यह क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत के लिए अपरिहार्य है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मध्य एशिया केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र है। चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, भारत के लिए इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखना अनिवार्य है।

  • ऊर्जा सुरक्षा: कजाकिस्तान में यूरेनियम के विशाल भंडार हैं और तुर्कमेनिस्तान प्राकृतिक गैस का प्रमुख स्रोत है।
  • सुरक्षा चुनौतियां: अफगानिस्तान में तालिबान के उदय के बाद, मध्य एशिया में कट्टरपंथ को रोकना भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • कनेक्टिविटी: पाकिस्तान द्वारा भूमि मार्ग अवरुद्ध किए जाने के कारण, भारत 'अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा' (INSTC) और ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से इस क्षेत्र तक पहुंच बनाना चाहता है।
मध्य एशिया में भारत की सक्रियता केवल व्यापार के लिए नहीं, बल्कि यूरेशिया में एक संतुलित शक्ति के रूप में उभरने के लिए आवश्यक है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

भारत और मध्य एशिया के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। उज्बेकिस्तान के टर्मेज़ में स्थित बौद्ध मठ इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन काल में कुषाण साम्राज्य के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान कितना गहरा था। हिंदी और उज्बेक भाषाओं में लगभग 3,000 साझा शब्द हैं, जो भाषाई निकटता को दर्शाते हैं।

देशप्रमुख संसाधन
कजाकिस्तानयूरेनियम, कोयला, सोना, लोहा
तुर्कमेनिस्तानप्राकृतिक गैस
किर्गिस्तानसोना, जलविद्युत
उज्बेकिस्तानसोना, यूरेनियम, प्राकृतिक गैस
Did You Know?: हिंदी और उज्बेक भाषाओं के बीच 3,000 से अधिक शब्द समान हैं, जो इनके गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. SCO क्या है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसमें भारत, चीन, रूस और मध्य एशियाई देश शामिल हैं।

2. भारत के लिए कनेक्टिविटी की मुख्य चुनौती क्या है?
पाकिस्तान द्वारा भूमि मार्ग को ब्लॉक करना भारत के लिए सबसे बड़ी बाधा है, जिसे भारत चाबहार पोर्ट के माध्यम से हल करने की कोशिश कर रहा है।