पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा में सिख समुदाय ने आरोप लगाया है कि एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा भवन, जिसमें स्कूल भी चलता था, उसे एक शॉपिंग मॉल बनाने के लिए ध्वस्त कर दिया गया है। स्थानीय सिख नेताओं और नागरिक समाज ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है।

  • क्वेटा के आर्चर रोड स्थित गुरुद्वारा श्री सिंह सभा की इमारत को कथित तौर पर ढहा दिया गया है।
  • सिख समुदाय का आरोप है कि यह संपत्ति एक निजी कंपनी को शॉपिंग प्लाजा बनाने के लिए सौंपी गई है।
  • स्थानीय सिख परिषद के अध्यक्ष जसबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने इस बारे में समुदाय को सूचित नहीं किया।
  • विपक्ष और भारत में भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में सिख समुदाय के बीच भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय सिख समुदाय और नागरिक समाज ने आरोप लगाया है कि गुरुद्वारा श्री सिंह सभा की ऐतिहासिक इमारत, जो एक स्कूल के रूप में भी उपयोग की जा रही थी, उसे कथित तौर पर एक शॉपिंग मॉल के निर्माण के लिए ध्वस्त कर दिया गया है।

विवाद की जड़: धार्मिक स्थल बनाम वाणिज्यिक उपयोग

बलूचिस्तान सिख परिषद के अध्यक्ष और स्थानीय सिख समुदाय के जथेदार जसबीर सिंह ने बताया कि आर्चर रोड स्थित इस गुरुद्वारे की इमारत को एक निजी कंपनी को 'शॉपिंग प्लाजा' स्थापित करने के लिए सौंप दिया गया है। यह इमारत 1930 के दशक से अस्तित्व में थी और विभाजन के बाद से इसका उपयोग सेंट गेब्रियल स्कूल चलाने के लिए किया जा रहा था।

जसबीर सिंह का कहना है कि जून महीने से ही विध्वंस की प्रक्रिया शुरू हो गई और स्कूल को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन इस महत्वपूर्ण निर्णय से सिख समुदाय को कोई पूर्व सूचना या परामर्श नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "उन्होंने हमारे गुरु के घर को तोड़ दिया है।"

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the systematic demolition of religious heritage sites in minority-populated areas often leads to deep-seated communal tensions and international diplomatic friction. The conversion of religious properties into commercial hubs under the guise of urban development poses a significant threat to the cultural identity of minority communities in Pakistan.

"उन्होंने केवल एक इमारत को नहीं ढहाया, बल्कि हमारे इतिहास, हमारे विश्वास और हमारी पहचान के एक टुकड़े को नष्ट कर दिया है।" - इंदरजीत सिंह, लेखक।

घटना के बाद भारत में भी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। पूर्व सांसद तरलोचन सिंह ने भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इसे पाकिस्तान में सिख समुदाय के अस्तित्व को मिटाने के व्यवस्थित प्रयास के रूप में वर्णित किया है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने एक अलग दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास मौजूद जानकारी के अनुसार, यह संपत्ति किसी गुरुद्वारे की नहीं बल्कि एक सिख व्यक्ति की निजी संपत्ति थी। हालांकि, जसबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पास दस्तावेज़ मौजूद हैं जो साबित करते हैं कि यह संपत्ति गुरुद्वारे की है।

Did You Know?: विभाजन से पहले क्वेटा में केवल 12 प्रमुख गुरुद्वारे हुआ करते थे, जिनमें से कई पर बाद में अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: गुरुद्वारा श्री सिंह सभा का क्या महत्व था?
उत्तर: यह 1930 के दशक से स्थापित एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल था, जहाँ सेंट गेब्रियल स्कूल भी संचालित होता था।

प्रश्न 2: एटीपीबी (ETPB) की क्या भूमिका है?
उत्तर: एटीपीबी पाकिस्तान में विभाजन के दौरान हिंदुओं और सिखों द्वारा छोड़ी गई संपत्तियों का संरक्षक है।