नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के दो परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। पिहानी के पपेंद्र सिंह और ऋषिपाल सिंह का 25 अगस्त से कोई संपर्क नहीं हुआ है, जिससे उनके परिजन बदहवास हैं।

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  • हरदोई के पिहानी के दो युवक नेपाल में बाढ़ के कारण लापता।
  • पपेंद्र सिंह और ऋषिपाल सिंह का 25 अगस्त के बाद से कोई संपर्क नहीं।
  • दोनों युवक नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत थे।
  • परिजनों ने सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।

नेपाल में कुदरत के कहर ने न केवल वहां के भूगोल को बदला है, बल्कि सीमा पार भारत के कई परिवारों की खुशियां भी छीन ली हैं। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी इलाके के अहेमी गांव से दो युवकों—पपेंद्र सिंह और ऋषिपाल सिंह—के लापता होने की खबर ने पूरे क्षेत्र को शोक और अनिश्चितता में डुबो दिया है। ये दोनों युवक रोजी-रोटी कमाने के उद्देश्य से नेपाल गए थे, लेकिन वहां आई विनाशकारी बाढ़ ने उनके परिवारों के बीच सन्नाटा पसर दिया है।

पपेंद्र सिंह (35) और ऋषिपाल सिंह (25) नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट-वन में अपनी सेवाएं दे रहे थे। पपेंद्र एक कुशल क्रेन ऑपरेटर थे, जबकि ऋषिपाल कटर मैन के रूप में कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार, 25 अगस्त को आखिरी बार उनसे सामान्य बातचीत हुई थी, जिसके बाद से उनके मोबाइल फोन बंद हैं और उनका कोई अता-पता नहीं है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षित स्थिति को रेखांकित करती है जो आपदा प्रभावित क्षेत्रों में काम करने के लिए मजबूर हैं। जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, तो संचार व्यवस्था ठप होने से परिवारों के लिए सबसे बड़ी सजा 'अनिश्चितता' बन जाती है।

'जब तक कोई खबर नहीं आती, तब तक उम्मीद और डर के बीच का संघर्ष ही परिवार की असली जिंदगी बन जाता है।'

पपेंद्र की पत्नी, रविंद्र कौर, का कहना है कि मोबाइल फोन अब उनके लिए केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि उम्मीद की आखिरी किरण बन गया है। हर बजती घंटी के साथ उन्हें लगता है कि शायद नेपाल से कोई संदेश आया हो। वहीं, पपेंद्र के पिता दरबार सिंह का कहना है कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं चाहिए, वे बस अपने बेटे को सुरक्षित देखना चाहते हैं।

नेपाल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशनों के बावजूद, अभी तक इन दोनों युवकों की कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। कंपनी के अधिकारियों ने सूचित किया है कि राहत कार्य जारी हैं, लेकिन हरदोई में बैठे परिवारों के लिए समय जैसे ठहर गया है।

Did You Know?: नेपाल की त्रिशूली नदी बेसिन में आने वाली बाढ़ अक्सर मानसून के दौरान अत्यधिक भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण होती है, जो बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाती है।

Frequently Asked Questions

1. पपेंद्र और ऋषिपाल आखिरी बार कब संपर्क में थे?
उनका आखिरी संपर्क 25 अगस्त को हुआ था, जिसके बाद से उनके मोबाइल बंद हैं।

2. वे नेपाल में कहाँ काम कर रहे थे?
वे नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट-वन में कार्यरत थे।