डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने H-1B वीजा आवेदनों पर $103,265 का भारी अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा। यह कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना बेहद महंगा बना सकता है।
- ट्रम्प प्रशासन ने प्रत्येक नए H-1B आवेदन पर $103,265 का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया है।
- इस फैसले का 71% भारतीय वीजा धारकों पर सीधा और गहरा प्रभाव पड़ेगा।
- यह शुल्क नियोक्ताओं (Employers) द्वारा दिया जाएगा, जिससे विदेशी प्रतिभाओं को काम पर रखना महंगा हो जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कुशल विदेशी श्रमिकों को काम पर रखने वाली कंपनियों को निशाना बनाया है। ट्रम्प प्रशासन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है जिसमें प्रत्येक H-1B कैप-सब्जेक्ट याचिका पर $103,265 का अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई है। यह शुल्क उन आवेदनों पर भी लागू होगा जो उन्नत डिग्री छूट (advanced-degree exemption) के पात्र हैं।
यह ट्रम्प का दूसरा प्रयास है कि वह H-1B प्रोग्राम पर भारी शुल्क लगाए। इससे पहले सितंबर 2025 में उन्होंने $100,000 का शुल्क लगाने की कोशिश की थी, जिसे एक संघीय न्यायाधीश ने जून में रद्द कर दिया था। अब नया प्रस्ताव अधिक व्यापक है और सीधे तौर पर उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों को प्रभावित कर सकता है जो अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद H-1B वीजा के माध्यम से करियर बनाना चाहते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस नीति का सबसे बड़ा शिकार भारतीय पेशेवर होंगे। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में से 71% भारतीय मूल के लोगों के लिए थीं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय इंजीनियरों और आईटी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की लागत आसमान छू जाएगी।
विदेशी श्रमिकों के प्रति यह कड़ा रुख श्रम बाजार के नियमों को बदलने की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे कंपनियों को अधिक चयनात्मक होने के लिए मजबूर किया जा सके।
इस मुद्दे पर बहस केवल राजनीतिक नहीं है। जहाँ टेक दिग्गज जैसे एलोन मस्क वैश्विक प्रतिभाओं को सिलिकॉन वैली में लाने के पक्ष में रहे हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि कंपनियां अक्सर कुशल अमेरिकी श्रमिकों के बजाय कम वेतन वाले विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता देती हैं। DHS का तर्क है कि कुछ बड़ी कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी करते हुए भी हजारों H-1B अनुमोदन प्राप्त करती रहती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रभाव
H-1B वीजा कार्यक्रम वार्षिक 85,000 की सीमा (65,000 नियमित और 20,000 उन्नत डिग्री के लिए) के तहत काम करता है। पिछले वर्ष 3,44,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिससे यह एक लॉटरी प्रणाली बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि H-1B धारक अक्सर अमेरिकी नागरिकों की तुलना में लगभग 16% कम कमाते हैं, जो सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए यह अंतर 30% तक बढ़ जाता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या यह शुल्क कर्मचारियों को देना होगा?
नहीं, प्रस्तावित नियम के अनुसार यह शुल्क नियोक्ताओं (कंपनियों) द्वारा दिया जाना चाहिए।
2. क्या यह नियम तुरंत लागू हो जाएगा?
नहीं, DHS ने सार्वजनिक टिप्पणी के लिए समय दिया है। 24 सितंबर के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।