अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के जापोरीजिया परमाणु संयंत्र ने बाहरी बिजली आपूर्ति खो दी है, जिससे रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए केवल 10 दिनों का डीजल बचा है।
- जापोरीजिया परमाणु संयंत्र में बाहरी बिजली आपूर्ति एक सप्ताह से अधिक समय से बंद है।
- रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए केवल 10 दिनों का डीजल स्टॉक उपलब्ध है।
- सैन्य गतिविधियों के कारण बिजली लाइनों को नुकसान पहुँचा है।
- IAEA मरम्मत के लिए स्थानीय युद्धविराम की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेन के दक्षिणी भाग में स्थित जापोरीजिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र एक अत्यंत गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने शनिवार को पुष्टि की कि संयंत्र ने अपनी बाहरी बिजली आपूर्ति खो दी है और वर्तमान में यह केवल आपातकालीन डीजल जनरेटरों पर निर्भर है। यह स्थिति परमाणु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है क्योंकि संयंत्र के छह गैर-संचालित रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए निरंतर बिजली की आवश्यकता होती है।
IAEA के अनुसार, संयंत्र के पास वर्तमान में केवल दस दिनों का डीजल भंडार बचा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में बाहरी स्थानों से डीजल की आपूर्ति की गई है, लेकिन पिछले छह महीनों से किसी भी ऑफ-साइट भंडारण सुविधा से कोई नई डिलीवरी नहीं हुई है। संयंत्र की सुरक्षा अब पूरी तरह से डीजल की उपलब्धता और आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा पर टिकी हुई है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जापोरीजिया की स्थिति केवल एक स्थानीय बिजली संकट नहीं है, बल्कि यह एक संभावित वैश्विक परमाणु आपदा का संकेत हो सकता है। यदि डीजल समाप्त हो जाता है और बिजली बहाल नहीं होती है, तो रिएक्टरों के कोर का तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ सकता है, जिससे विकिरण का रिसाव होने का खतरा है।
डीजल ईंधन की उपलब्धता परमाणु संयंत्र के बाहरी बिजली खोने की स्थिति में सर्वोपरि है।
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वसनीय बाहरी बिजली और सुरक्षित आपूर्ति मार्ग परमाणु सुरक्षा के लिए अपरिहार्य हैं। संयंत्र ने बिजली आपूर्ति तब खो दी जब नीपर नदी के उत्तरी हिस्से में सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जापोरीजिया संयंत्र को मार्च 2022 में रूस द्वारा कब्जा कर लिया गया था। तब से, यह क्षेत्र संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर इस साइट को निशाना बनाने का आरोप लगाते रहते हैं। IAEA की टीमें सितंबर 2022 से वहां तैनात हैं, लेकिन युद्ध की निरंतरता ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को अत्यधिक कठिन बना दिया है।
Frequently Asked Questions
1. जापोरीजिया संयंत्र में बिजली क्यों चली गई?
नीपर नदी के उत्तरी क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों के कारण बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
2. क्या परमाणु विस्फोट का खतरा है?
वर्तमान में रिएक्टर बंद हैं, लेकिन यदि कूलिंग सिस्टम (डीजल के माध्यम से) विफल हो जाता है, तो गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।