इज़रायली सेना और पुलिस ने पूर्वी यरुशलम में UNRWA के ऐतिहासिक कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर पर छापा मारकर उसे बंद करने की धमकी दी है। यह केंद्र फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए रोजगार का एकमात्र प्रमुख साधन है।

  • इज़रायली सैनिकों ने कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर पर छापा मारकर 40 कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया है।
  • यह केंद्र 70 से अधिक वर्षों से फिलिस्तीनी शरणार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान कर रहा है।
  • इज़राइल इस भूमि को यरुशलम नगर पालिका को सौंपने की योजना बना रहा है।
  • UNRWA का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षित है।

पूर्वी यरुशलम में स्थित UNRWA का कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर आज एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। इज़रायली सेना और पुलिस के हालिया छापे ने इस ऐतिहासिक संस्थान के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। शुक्रवार दोपहर तक, हालांकि सैनिक परिसर से हट गए थे, लेकिन आसमान में मंडराते इज़रायली ड्रोन की निगरानी ने वहां के तनाव को स्पष्ट कर दिया था।

छापे के बाद परिसर की स्थिति भयावह थी। टूटे हुए कांच, जले हुए फर्श और तहस-नहस किए गए क्लासरूम इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह हमला कितना गंभीर था। UNRWA ने पुष्टि की है कि परिसर में घुसपैठ करने वाले लोगों ने सामान चोरी करने का भी प्रयास किया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने ही वाला था, लेकिन इस कार्रवाई ने हजारों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डाल दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि यह फिलिस्तीनी समुदाय के आर्थिक आधार पर प्रहार है। कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर से हर साल लगभग 340 छात्र स्नातक होते हैं, जिनमें से 90% को तुरंत रोजगार मिल जाता है। वेस्ट बैंक में बेरोजगारी की उच्च दर को देखते हुए, यह केंद्र जीवन रेखा की तरह काम करता है।

इस संस्थान का बंद होना फिलिस्तीनी शरणार्थियों के कौशल विकास और उनके आर्थिक स्वावलंबन की संभावनाओं को खत्म करने जैसा है।

इस बार की छापेमारी विशेष रूप से अलग थी क्योंकि इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर खुद मौके पर मौजूद थे। उन्होंने उपहास करते हुए कहा, "यहाँ UNRWA का निदेशक बैठता था, और अब मैं उसकी जगह बैठा हूँ"। इज़रायली विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि इस भूमि को यरुशलम नगर पालिका को सौंपकर एक शैक्षिक परिसर में बदल दिया जाएगा, हालांकि यह वही कार्य है जो वर्तमान में UNRWA कर रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना 1952 में की गई थी। यह 8 हेक्टेयर भूमि जॉर्डन सरकार द्वारा UNRWA को किराए पर दी गई थी। 1967 के युद्ध और उसके बाद के कब्जे के बाद से, यह संस्थान फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए कौशल विकास का मुख्य केंद्र बना रहा है। 73 वर्षीय युसूफ अबू लतीफ़ा जैसे कई पूर्व छात्र इस संस्थान के महत्व को जानते हैं, जिन्होंने इसके माध्यम से अपना करियर बनाया।

इज़राइल का UNRWA के खिलाफ अभियान पिछले कुछ वर्षों में तीव्र हुआ है। 2024 में कनेसेट (Knesset) द्वारा पारित कानून और अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के वीज़ा पर रोक लगाने जैसे कदमों ने एजेंसी की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से बाधित किया है।

Did You Know?: कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर के स्नातक 16 विभिन्न क्षेत्रों जैसे टेलीकम्युनिकेशन और इंटीरियर डिजाइन में डिप्लोमा प्राप्त करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. कलंदीया ट्रेनिंग सेंटर क्या है?
यह UNRWA द्वारा संचालित एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र है जो फिलिस्तीनी शरणार्थियों को रोजगार योग्य कौशल सिखाता है।

2. इज़राइल इस भूमि पर क्या दावा कर रहा है?
इज़राइल का दावा है कि यह भूमि 'यहूदी राष्ट्रीय कोष' की है और इसे यरुशलम नगर पालिका को सौंपा जाना चाहिए।