आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 5,000 लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया को 'विविधता में एकता' का व्यावहारिक उदाहरण देना है। उन्होंने वैश्विक शांति और मानवता के लिए भारत के सांस्कृतिक योगदान पर जोर दिया।

  • मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' सम्मेलन को संबोधित किया।
  • उन्होंने कहा कि भारत का मिशन केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि विविधता के साथ एकता का अभ्यास करना है।
  • भागवत ने प्रवासी भारतीयों से उनके वर्तमान निवास स्थान (कर्मभूमि) के प्रति कर्तव्यों को निभाने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए भारत के वैश्विक मिशन को रेखांकित किया। लगभग 5,000 लोगों की उपस्थिति में, उन्होंने कहा कि भारत का 'भाग्य' दुनिया को यह समझाना है कि विविधता और एकता एक साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को यह बात केवल उपदेशों के माध्यम से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और आचरण के माध्यम से सिद्ध करनी होगी।

स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए, भागवत ने तर्क दिया कि प्रत्येक राष्ट्र का एक संदेश, एक मिशन और एक नियति होती है। उन्होंने कहा, "भारत के लिए, यह एकता और विविधता हमारे डीएनए का हिस्सा है। विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन साथ ही, हमें एकजुटता की भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए।"

क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भागवत का यह संबोधन वैश्विक मंच पर आरएसएस के विश्वदृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। यह केवल एक सांस्कृतिक भाषण नहीं था, बल्कि पश्चिमी देशों के सामने भारत की 'सॉफ्ट पावर' और सभ्यतागत भूमिका को पुनर्परिभाषित करने का एक प्रयास था।

भारत का मिशन केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि विविधता के साथ एकता का व्यावहारिक उदाहरण पेश करना है।

यह कार्यक्रम 'AHEAD फोरम' द्वारा आयोजित किया गया था, जो आरएसएस के शताब्दी वर्ष के वैश्विक आउटरीच का हिस्सा है। हालांकि, यह कार्यक्रम न्यूयॉर्क में विवादों से घिरा रहा। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इस आयोजन का विरोध करते हुए इसे एक "बहिष्करणवादी दृष्टिकोण" वाला कार्यक्रम बताया था। इसके अलावा, कई अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकार समूहों ने भी कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की थी।

भागवत ने मानवता और प्रकृति के बीच संबंधों पर भी गहराई से बात की। उन्होंने यूवल नोआ हरारी की पुस्तक 'सैपियंस' का संदर्भ देते हुए कहा कि मनुष्य को प्रकृति का स्वामी बनने के बजाय अन्य प्रजातियों के संरक्षण का कर्तव्य निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवता 'आत्मन' के माध्यम से जुड़ी हुई है, जैसे एक धागे में पिरोए गए मोती।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत की सभ्यता ने हमेशा से ही 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के विचार को बढ़ावा दिया है। हिमालय से लेकर समुद्र तक फैले इस राष्ट्र ने विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों को एक सूत्र में पिरोने की कला विकसित की है, जिसे भागवत ने भारत की 'नियति' बताया है।

Did You Know?: भारत की 'विविधता में एकता' की अवधारणा सदियों पुराने दार्शनिक सिद्धांतों पर आधारित है, जो भौतिक भिन्नताओं के बावजूद आध्यात्मिक एकता पर जोर देती है।

Frequently Asked Questions

1. मोहन भागवत ने प्रवासी भारतीयों को क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि प्रवासियों की पहली जिम्मेदारी उनके वर्तमान निवास स्थान (जैसे अमेरिका) के प्रति है, जिसे उन्होंने 'कर्मभूमि' कहा।

2. न्यूयॉर्क में इस कार्यक्रम का विरोध क्यों हुआ?
कुछ स्थानीय नेताओं और नागरिक अधिकार समूहों ने इसे एक 'बहिष्करणवादी' विचारधारा का हिस्सा मानकर विरोध किया था।