प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में उच्च स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों ने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस समझौते में यूरेनियम की आपूर्ति, रक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।

  • भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में अपग्रेड किया गया।
  • दोनों देशों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
  • नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति हेतु एक ढांचा तैयार किया गया है।
  • UPI जैसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और रक्षा सहयोग पर विशेष सहमति बनी।

ताशकंद, उज्बेकिस्तान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा ने दक्षिण और मध्य एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय लिख दिया है। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ कुक्सारो presidential पैलेस में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने का औपचारिक निर्णय लिया है।

इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन का मुख्य आकर्षण ऊर्जा सुरक्षा रहा। भारत ने अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए उज्बेकिस्तान से यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष ढांचा स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बढ़ता व्यापार और आर्थिक लक्ष्य

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों राष्ट्रों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 1 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 5 बिलियन डॉलर करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस आर्थिक विस्तार को गति देने के लिए, दोनों पक्षों ने मौजूदा संयुक्त आयोग को सचिव स्तर से बढ़ाकर 'मंत्रालयी स्तर' पर करने का निर्णय लिया है।

यह साझेदारी न केवल व्यापारिक है, बल्कि यह मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने का एक मास्टरस्ट्रोक है।

डिजिटल और रक्षा सहयोग का नया युग

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह समझौता केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। भारत अब उज्बेकिस्तान के साथ डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI), विशेष रूप से UPI के विस्तार पर सहयोग कर रहा है। इसके साथ ही, रक्षा, सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए, उज्बेकिस्तान में बौद्ध स्थलों—फयाज टेपा और करा टेपा—के संरक्षण और बहाली के लिए एक आशय पत्र (Letter of Intent) पर भी सहमति बनी है। प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित 'ओलीय दराजली दोस्तलिक' सम्मान से भी नवाजा गया।

Why This Matters

मध्य एशिया में भारत की भूमिका को देखते हुए, उज्बेकिस्तान के साथ यह गहराता संबंध 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की औद्योगिक और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

Did You Know?: प्रधानमंत्री मोदी की यह उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है, जो इस देश के साथ भारत के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

Frequently Asked Questions

1. भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

2. यूरेनियम समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता भारत की नागरिक परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।