यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की रिफाइनरियों में व्यवधान आने के बाद, भारत रूस को पेट्रोल की आपूर्ति करने वाला एक महत्वपूर्ण देश बनकर उभरा है। शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि रूस की ईंधन मांग को पूरा करने में भारतीय रिफाइनरियों की भूमिका बढ़ गई है।
- यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की घरेलू ईंधन उत्पादन क्षमता को 70% तक कम कर दिया है।
- अगस्त में रूस का समुद्री पेट्रोल आयात रिकॉर्ड स्तर 1,25,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
- भारत की तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 48% हो गई है।
- गुजरात की नायरा एनर्जी (Nayara Energy) की वदीना रिफाइनरी इस आपूर्ति में प्रमुख भूमिका निभा रही है।
हालिया शिप ट्रैकिंग डेटा और ऊर्जा विश्लेषण फर्म Vortexa की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर किए गए लगातार ड्रोन हमलों ने रूस की घरेलू ईंधन उत्पादन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस संकट के बीच, भारत रूस के लिए पेट्रोल (गैसोलीन) के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। अगस्त के महीने में रूस का समुद्री पेट्रोल आयात बढ़कर लगभग 1,25,000 बैरल प्रतिदिन (kbd) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
रूस के ईंधन संकट का गहराता संकट
रूस की ऊर्जा बुनियादी संरचना पर हमलों ने वहां की घरेलू उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट दर्ज की है। रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के कारण रूस के घरेलू ईंधन उत्पादन में 70% तक की कमी आई है। इस आपूर्ति की कमी ने मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के लिए मजबूर कर दिया है। रूस ने खुद के घरेलू बाजार को स्थिर करने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर जनवरी 2027 तक प्रतिबंध लगा रखा है, जिससे उसे बाहरी देशों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले दो महीनों में लगभग 10 लाख बैरल पेट्रोल की आपूर्ति की है। व्यापारिक स्रोतों का कहना है कि यह आपूर्ति मुख्य रूप से गुजरात की वदीना रिफाइनरी से आ रही है, जिसे नायरा एनर्जी द्वारा संचालित किया जाता है। उल्लेखनीय है कि इस रिफाइनरी में रूस की दिग्गज कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) की भी हिस्सेदारी है।
भू-राजनीतिक समीकरण और भारत की भूमिका
2022 में शुरू हुए संघर्ष के बाद से, भारत ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस की ओर रुख किया है। वर्तमान में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 48% के सर्वकालिक उच्च स्तर पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जो पेट्रोल रूस को निर्यात कर रहा है, वह संभवतः उसी रूसी कच्चे तेल से बनाया गया है जिसे भारत पहले आयात करता है।
रूस और भारत के बीच ऊर्जा व्यापार का यह नया स्वरूप वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक जटिल बदलाव को दर्शाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटनाक्रम न केवल ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती स्वायत्तता को भी दर्शाता है। एक तरफ जहां पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बना रहा है।
Frequently Asked Questions
1. रूस को पेट्रोल की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे वहां का घरेलू उत्पादन 70% तक गिर गया है।
2. भारत रूस से कितना कच्चा तेल खरीद रहा है?
जून और जुलाई में भारत ने प्रतिदिन 26 लाख बैरल से अधिक रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो भारत के कुल आयात का आधे से अधिक है।