वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय वायुसेना चीन के सबसे उन्नत J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमानों को मार गिराने के लिए विशेष युद्धाभ्यास कर रही है। दूसरी ओर, चीनी वायुसेना ने मिस्र के राफेल विमानों के खिलाफ पहली बार हवाई अभ्यास कर भारतीय राफेल की ताकत को समझने की कोशिश शुरू कर दी है।
- भारतीय वायुसेना चीन के पांचवीं पीढ़ी के चेंगदू J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमानों का मुकाबला करने के लिए विशेष रणनीति विकसित कर रही है।
- चीनी J-16 लड़ाकू विमानों ने हाल ही में मिस्र के राफेल और मिग-29 विमानों के साथ 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन' युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।
- यह पहली बार है जब चीनी लड़ाकू विमानों का सामना फ्रांसीसी मूल के राफेल से हुआ है, जो भारतीय वायुसेना की भी रीढ़ है।
हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानों तक, इस समय एक बेहद संवेदनशील सैन्य शतरंज का खेल खेला जा रहा है। भारतीय वायुसेना (IAF) और चीनी वायुसेना (PLAAF) भविष्य के संभावित हवाई संघर्षों के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। भारत ने चीन के सबसे आधुनिक और खतरनाक चेंगदू J-20 (Chengdu J-20) पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान को ट्रैक करने और उसे नष्ट करने के लिए अपने युद्धाभ्यास और प्रशिक्षण को काफी तेज कर दिया है।
दूसरी ओर, एक बेहद दुर्लभ और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, चीन के शेनयांग J-16 (Shenyang J-16) लड़ाकू विमानों ने मिस्र में आयोजित 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन' (Eagles of Civilisation) हवाई अभ्यास में भाग लिया। इस युद्धाभ्यास के दौरान चीनी पायलटों का सीधा मुकाबला मिस्र के डसॉल्ट राफेल (Dassault Rafale) और रूस निर्मित मिग-29M/M2 (MiG-29) विमानों से हुआ। सैन्य इतिहास में यह पहली बार है जब चीन के किसी अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान ने राफेल के खिलाफ हवाई युद्ध का अभ्यास किया है।
रणनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि मिस्र में चीन का मुख्य उद्देश्य राफेल विमान के इलेक्ट्रॉनिक और लड़ाकू डेटा को इकट्ठा करना था। चूंकि भारत भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी हवाई संप्रभुता की रक्षा के लिए राफेल विमानों का संचालन करता है, इसलिए इस फ्रांसीसी जेट की रडार सिग्नेचर, पैंतरेबाज़ी और हथियार प्रणालियों को समझना बीजिंग के लिए एक बड़ा रणनीतिक लाभ है। चीन इस डेटा का उपयोग अपने J-20 और J-16 विमानों को राफेल के खिलाफ तैयार करने के लिए कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि एशिया में हवाई युद्ध की रणनीतियां अब संख्यात्मक श्रेष्ठता से हटकर पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी युद्ध की ओर बढ़ रही हैं। चीन द्वारा राफेल के खिलाफ J-16 का परीक्षण यह दर्शाता है कि बीजिंग राफेल को अपने पश्चिमी थिएटर कमांड के लिए एक बड़ा खतरा मानता है। मिस्र के राफेल का अध्ययन कर चीनी वायुसेना सीधे तौर पर भारत के खिलाफ अपनी युद्ध रणनीतियों को धार दे रही है, जिससे इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
"मिस्र में J-16 और राफेल के बीच मुकाबला केवल एक नियमित अभ्यास नहीं है; यह अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों, विशेष रूप से भारत की वायु रक्षा प्रणालियों को समझने और उनके खिलाफ रणनीति बनाने के लिए बीजिंग का एक सुनियोजित खुफिया मिशन है।" - सैन्य विमानन विशेषज्ञ
भारतीय वायुसेना की जवाबी तैयारी
हालांकि, भारत भी चीन की इन चालों से बेखबर नहीं है। भारतीय वायुसेना अपने सुखोई Su-30MKI और राफेल विमानों के साथ लगातार ऐसे अभ्यास कर रही है जिससे स्टील्थ विमानों का पता लगाया जा सके। भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि J-20 के स्टील्थ (रडार से बचने की क्षमता) दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। भारतीय वायुसेना के उन्नत रडार और इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) प्रणालियों की मदद से चीनी स्टील्थ विमानों को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है और उन्हें मार गिराया जा सकता है।
| विशेषता | चेंगदू J-20 (चीन) | शेनयांग J-16 (चीन) | डसॉल्ट राफेल (भारत/मिस्र) |
|---|---|---|---|
| पीढ़ी (Generation) | 5वीं पीढ़ी (स्टील्थ) | 4.5 पीढ़ी | 4.5 पीढ़ी |
| अधिकतम गति | मैक 2.0+ | मैक 2.2 | मैक 1.8 |
| मुख्य भूमिका | हवाई वर्चस्व / स्टील्थ हमला | मल्टीरोल स्ट्राइक फाइटर | ओम्नीरोल फाइटर |
| कॉम्बैट रेंज | 2,000 किमी | 1,500 किमी | 1,850 किमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: चीन मिस्र के राफेल विमानों में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है?
उत्तर 1: चीन राफेल की युद्ध क्षमताओं और रडार सिग्नेचर को समझना चाहता है क्योंकि उसका मुख्य क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी भारत भी सीमा पर इसी विमान का संचालन करता है।
प्रश्न 2: क्या भारत के सुखोई और राफेल चीन के J-20 स्टील्थ विमान का पता लगा सकते हैं?
उत्तर 2: हां, भारतीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक AESA रडार और इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) प्रणालियों की मदद से J-20 जैसी स्टील्थ तकनीकों को ट्रैक किया जा सकता है।