नेपाली सेना ऊपरी त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 42 कर्मचारियों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी और विस्फोटकों का उपयोग कर रही है। नेपाल में बाढ़ के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं में सैकड़ों कर्मचारी लापता हैं।
- ऊपरी त्रिशूली-3A सुरंग में 42 तकनीकी कर्मचारी फंसे होने की आशंका है।
- नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और पुलिस की 90 सदस्यीय संयुक्त टीम तैनात है।
- भारत और चीन से विशेषज्ञ बचाव कार्यों में सहायता के लिए नेपाल पहुंचे हैं।
- नेपाल के नौ जलविद्युत प्रोजेक्ट्स में कुल 537 कर्मचारी अभी भी लापता हैं।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद, नेपाली सेना के इंजीनियरों ने रविवार को ऊपरी त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 42 लोगों तक पहुंचने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। बचाव दल भारी उपकरणों और नियंत्रित विस्फोटों (controlled blasting) का उपयोग करके सुरंग के प्रवेश द्वार को चौड़ा करने की कोशिश कर रहा है। यह ऑपरेशन नेपाल में आई जलविद्युत आपदा के भयावह पैमाने को दर्शाता है, जहां कई परियोजनाओं में सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।
बचाव अभियान की वर्तमान स्थिति
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, एक 90 सदस्यीय संयुक्त रेस्क्यू टीम को साइट पर तैनात किया गया है। इस टीम में 66 नेपाली सेना के जवान, जिनमें प्रशिक्षित कुत्तों के साथ एक विशेष खोज और बचाव दल शामिल है, 18 सशस्त्र पुलिस बल के कर्मी और 6 नेपाल पुलिस के जवान शामिल हैं। बचाव दल ने सुरंग के मुख्य हिस्से, जिसे 'क्राउन हेड' कहा जाता है, में लगभग 2-बाय-3 फुट का छेद बनाने में सफलता हासिल की है। हालांकि, रस्सियों के सहारे नीचे जाने के बाद भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
बचाव कार्य को गति देने के लिए नेपाली सेना ने भारी मशीनरी जैसे एक्सकेवेटर और बुलडोजर को हेलीकॉप्टर के माध्यम से नुआकोट के बत्तर क्षेत्र में एयरलिफ्ट किया है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरंग का मुहाना ऊर्ध्वाधर छेद से लगभग 40 मीटर ऊपर और आठ मीटर नीचे स्थित है, जिससे बचाव कार्य काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नेपाल की जलविद्युत बुनियादी ढांचा आपदा न केवल मानवीय संकट है, बल्कि यह क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक गंभीर खतरा है। इतने बड़े पैमाने पर श्रमिकों का लापता होना और बुनियादी ढांचे का विनाश नेपाल की आपदा प्रबंधन क्षमताओं के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
सुरंगों में फंसे श्रमिकों को बचाना अत्यधिक जोखिम भरा है, विशेष रूप से तब जब मिट्टी और मलबे के कारण संरचनात्मक स्थिरता अनिश्चित हो।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लापता श्रमिकों का डेटा
इस संकट की गंभीरता को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय मदद भी पहुंच रही है। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल इंजीनियरों की एक 11 सदस्यीय भारतीय तकनीकी टीम ने रेकी की है। इसके अलावा, भारतीय सेना की एक 22 सदस्यीय टीम भी सहायता के लिए तैनात की गई है। वहीं, चीन से छह विशेषज्ञों की एक टीम भी त्रिशूली क्षेत्र में पहुंच चुकी है।
इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IPPAN) के आंकड़ों के अनुसार, रासुवा और नुआकोट में नौ जलविद्युत परियोजनाओं में कुल 537 कर्मचारी लापता हैं। 216 मेगावाट की ऊपरी त्रिशूली-1 परियोजना में सबसे अधिक स्थिति गंभीर है, जहां लगभग 300 कर्मचारी सुरंग के भीतर फंसे होने की आशंका है।
| परियोजना का नाम | लापता कर्मचारियों की संख्या (अनुमानित) | स्थिति |
|---|---|---|
| ऊपरी त्रिशूली-3A | 42 | सुरंग में फंसे |
| ऊपरी त्रिशूली-1 | ~300 | गंभीर स्थिति |
| चिलिमे जलविद्युत परियोजना | 6-8 | बचाव जारी |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ऊपरी त्रिशूली-3A में कितने लोग फंसे हुए हैं?
उत्तर: वर्तमान रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 42 तकनीकी कर्मचारी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं।
प्रश्न 2: बचाव कार्य में कौन से देश मदद कर रहे हैं?
उत्तर: भारत और चीन ने अपने तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों को बचाव कार्यों में सहायता के लिए भेजा है।