प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के साथ ताशकंद में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में भारत की परमाणु ऊर्जा सुरक्षा और यूरेनियम आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्ज़ियोयेव के बीच ताशकंद में उच्च स्तरीय बैठक।
- भारत की परमाणु ऊर्जा सुरक्षा के लिए उज्बेकिस्तान के यूरेनियम भंडार पर चर्चा।
- 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य।
- रक्षा, कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग का विस्तार।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र बिंदु दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, विशेष रूप से परमाणु ईंधन के क्षेत्र में सहयोग स्थापित करना रहा।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और 2047 तक 100 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार नए स्रोतों की तलाश कर रहा है। उज्बेकिस्तान के पास यूरेनियम के विशाल भंडार हैं, जो भारत के लिए रूस और कजाकिस्तान के अलावा एक विश्वसनीय और विविध विकल्प प्रदान कर सकते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह कदम केवल ऊर्जा के बारे में नहीं है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने के बारे में है। यूरेनियम आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाकर, भारत किसी एक देश पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है।
यूरेनियम की सुरक्षित आपूर्ति भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और नेट-जीरो लक्ष्यों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
इस वार्ता के दौरान केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि रक्षा, कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में भी द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर सहमति बनी। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते संबंध मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और अधिक मजबूत करेंगे।
Historical Background
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध दशकों पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में रणनीतिक साझेदारी में तेजी आई है। उज्बेकिस्तान भारत के लिए मध्य एशियाई देशों में एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, विशेष रूप से कनेक्टिविटी और व्यापारिक गलियारों के संदर्भ में।
Frequently Asked Questions
1. भारत उज्बेकिस्तान से यूरेनियम क्यों चाहता है?
भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए यूरेनियम के स्रोतों में विविधता लाना चाहता है ताकि वह रूस जैसे कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भर न रहे।
2. भारत का 2047 का लक्ष्य क्या है?
भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।