प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा केवल क्षेत्रीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका को मजबूत करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल है।
- प्रधानमंत्री मोदी की चार दिवसीय यात्रा मध्य एशिया में भारत के प्रभाव को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।
- आगामी सितंबर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन और 2028-2029 के लिए UNSC कार्यकाल पर चर्चा प्रमुख एजेंडा है।
- भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की योजना बनाना और कनेक्टिविटी के मुद्दों को हल करना एक बड़ी चुनौती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य की चार दिवसीय यात्रा केवल दो महत्वपूर्ण मध्य एशियाई राज्यों तक सीमित नहीं है। यह यात्रा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के दायरे से कहीं आगे निकलकर वैश्विक कूटनीति के कई महत्वपूर्ण मोर्चों को छूती है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आगामी सितंबर में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करना और 2028-2029 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के दो साल के कार्यकाल के लिए रणनीतिक आधार बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत-मध्य एशिया संबंधों में आई खटास को दूर करना है। 2022 के बाद से भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन नहीं हुआ है, जिससे क्षेत्र में यह धारणा बन गई थी कि नई दिल्ली इस क्षेत्र में अपनी रुचि खो रही है। मोदी का इस दौरे का सबसे बड़ा लक्ष्य इस धारणा को बदलना और मध्य एशिया के साथ भारत के पुराने वादों को फिर से जीवित करना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मध्य एशिया में भारत की उपस्थिति केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यदि भारत इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सुरक्षा के मुद्दों पर प्रभावी ढंगता से काम करता है, तो यह चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच एक मजबूत विकल्प पेश कर सकता है।
मध्य एशिया के साथ भारत का जुड़ाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
ऐतिहासिक रूप से, 2012 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति शुरू करने के बाद से व्यापार में वृद्धि देखी गई है। व्यापारिक वस्तुओं का मूल्य 2010 में 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 2 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। हालांकि, भू-राजनीतिक बदलावों के कारण बुनियादी ढांचे और पाइपलाइनों के माध्यम से कनेक्टिविटी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने पांचों मध्य एशियाई देशों का दौरा किया था, जिसे भारत की 'एक्ट ईस्ट' और 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया था। उस समय उन्होंने एशिया के विखंडन को रोकने और कनेक्टिविटी को पुनर्जीवित करने का वादा किया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी, UNSC सदस्यता के लिए समर्थन जुटाना और मध्य एशिया के साथ संबंधों को मजबूत करना है।
प्रश्न 2: भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन कब से नहीं हुआ है?
उत्तर: भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन 2022 के बाद से आयोजित नहीं हुआ है।