प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में अपग्रेड किया। दोनों देशों ने 2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य का निर्धारण किया है।

  • भारत और उज्बेकिस्तान ने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' में उन्नत किया।
  • वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर निर्धारित किया गया।
  • पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान 'ओलीय दरजाली दोस्तलिक' से नवाजा गया।
  • शास्त्री मेमोरियल पर प्रधानमंत्री ने पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय उज्बेकिस्तान राज्य दौरे के दौरान ताशकंद में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने शास्त्री मेमोरियल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया, जो 1966 में इसी शहर में निधन के बाद देश के लिए एक भावुक क्षण था। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान, मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों का 'रणनीतिक साझेदारी' से 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में उन्नयन है। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए 2030 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक आगामी 'बिजनेस समिट' आयोजित करने पर भी सहमति बनी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि उज्बेकिस्तान के साथ यह बढ़ता जुड़ाव मध्य एशिया में भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति की सफलता को दर्शाता है। उज्बेकिस्तान न केवल ऊर्जा और खनिजों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक गलियारों के विस्तार के लिए भी एक रणनीतिक द्वार है।

शास्त्री जी का 'जय जवान, जय किसान' का संदेश आज भी वैश्विक शांति और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में प्रासंगिक है।

राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दोस्ती को मजबूत करने में पीएम मोदी के योगदान के लिए उन्हें उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान 'ओलीय दरजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और मध्य एशियाई देशों के साथ उसके गहरे संबंधों का प्रतीक है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक साझा कदम उठाते हुए, दोनों नेताओं ने भारत की 'एक पेड़ माँ के नाम' और उज्बेकिस्तान की 'यशिल माकोन' पहल के तहत राष्ट्रपति महल के बगीचे में एक पौधा लगाया। यह सांकेतिक कदम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में हुआ था, जब उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने वाले 'ताशकंद समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे। उनका जीवन सादगी और साहस का प्रतीक रहा है, और उनका निधन आज भी भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक माना जाता है।

Frequently Asked Questions

1. भारत और उज्बेकिस्तान के बीच नया व्यापार लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य रखा है।

2. पीएम मोदी को कौन सा सम्मान दिया गया?
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान 'ओलीय दरजाली दोस्तलिक' से नवाजा है।

Did You Know?: लाल बहादुर शास्त्री ने ताशकंद समझौते के कुछ ही घंटों बाद अंतिम सांस ली थी।