प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान 'ओली डराजली दोस्तलिक' को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने संबंधों को समर्पित किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक उन्नत किया है।
- प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान 'ओली डराजली दोस्तलिक' से सम्मानित किया गया।
- भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में बदला गया।
- पीएम मोदी ताशकंद के बाद एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए किर्गिस्तान रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'ओली डराजली दोस्तलिक' (Oliy Darajali Do'stlik) से सम्मानित किया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय 140 करोड़ भारतीयों के सम्मान और दोनों देशों के बीच अटूट बंधन के रूप में स्वीकार किया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद, प्रधानमंत्री ने 'दोस्तलिक' शब्द के गहरे अर्थ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में 'दोस्ती' शब्द हर घर में बोला जाता है, और यह पुरस्कार वास्तव में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच के भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतिबिंब है। उन्होंने इसे दोनों देशों की साझा विरासत और सदियों पुरानी मित्रता को समर्पित किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह सम्मान केवल एक औपचारिक प्रोटोकॉल नहीं है, बल्कि मध्य एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक पैठ का संकेत है। उज्बेकिस्तान के साथ संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक ले जाना यह दर्शाता है कि भारत अब व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और अधिक मजबूत करना चाहता है। यह कदम विशेष रूप से चीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाने में मदद करेगा।
"मध्य एशिया के साथ रणनीतिक साझेदारी का विस्तार भारत के 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' विजन को नई ऊंचाई प्रदान करता है।"
इस दो दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को दूर करना, हरित ऊर्जा समाधानों पर सहयोग करना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है। यह यात्रा 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है, जो किर्गिस्तान में आयोजित होने जा रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। सिल्क रोड के माध्यम से प्राचीन काल से ही व्यापार और विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। वर्तमान में, भारत उज्बेकिस्तान को फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और कृषि प्रौद्योगिकी में सहायता प्रदान कर रहा है, जबकि उज्बेकिस्तान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'ओली डराजली दोस्तलिक' पुरस्कार क्या है?
उत्तर: यह उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो असाधारण सेवाओं और अंतर्राष्ट्रीय मित्रता को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है।
प्रश्न 2: भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों में क्या बड़ा बदलाव आया है?
उत्तर: दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को अब एक 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया है।