न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख ने 'हिंदू राष्ट्र' की व्याख्या करते हुए कहा कि हिंदुत्व किसी भी समुदाय को बाहर नहीं करता है। उन्होंने विविधता में एकता और सांस्कृतिक सद्भाव पर जोर दिया।
- आरएसएस प्रमुख ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' को संबोधित किया।
- हिंदुत्व को एक सांस्कृतिक विचार बताया जो मुस्लिमों को बाहर नहीं करता।
- न्यूयॉर्क के मेयर और विरोध प्रदर्शनों ने कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया।
- आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह वैश्विक यात्रा का हिस्सा है।
न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय बना देने वाला संबोधन दिया। लगभग 5,000 भारतीय-अमेरिकी नागरिकों की उपस्थिति में, उन्होंने 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ मुसलमानों को भारत से बाहर निकालना नहीं है।
अपने भाषण में, उन्होंने हिंदुत्व को एक समावेशी सांस्कृतिक विचार के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने तर्क दिया कि हिंदुत्व किसी विशेष धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति और सांस्कृतिक पहचान है जो भारत के सभी समुदायों को अपने भीतर समाहित करती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वास्तविक परिवर्तन राजनीतिक शक्ति से नहीं, बल्कि जनमत के माध्यम से आता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संबोधन वैश्विक स्तर पर आरएसएस की बदलती छवि और उसकी वैचारिक स्पष्टता को रेखांकित करने का एक प्रयास है। न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक केंद्र में इस तरह का बयान देना भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की एक रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है।
हिंदुत्व को एक राजनीतिक उपकरण के बजाय एक सांस्कृतिक सूत्र के रूप में प्रस्तुत करना वैश्विक विमर्श को बदलने की एक गहरी कोशिश है।
हालांकि, यह कार्यक्रम विवादों से अछूता नहीं रहा। कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों ने इसे एक 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया, जबकि न्यूयॉर्क के मेयर ने आरएसएस की आलोचना करते हुए इसे एक विशिष्टतावादी (exclusionary) संगठन बताया। यह विरोध प्रदर्शन उस वैचारिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है जो वैश्विक स्तर पर इस संगठन के प्रति मौजूद है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और वर्तमान में यह दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक है। संगठन अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वैश्विक आउटरीच कर रहा है, जिसके तहत न्यूयॉर्क के बाद अब कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में भी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आरएसएस प्रमुख ने हिंदुत्व के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक सांस्कृतिक विचार है जो किसी भी समुदाय, विशेषकर मुस्लिमों को बाहर नहीं करता है।
प्रश्न 2: इस कार्यक्रम का विरोध क्यों हुआ?
उत्तर: न्यूयॉर्क के मेयर और कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरएसएस को एक बहिष्कारी संगठन मानते हुए इसका विरोध किया।