एक हृदयविदारक खुलासे में ब्रिटेन के उस काले दौर का पर्दाफाश हुआ है जब 1949 से 1976 के बीच लाखों महिलाओं से जबरन उनके नवजात बच्चों को छीन लिया गया। मैरियन मैकमिलन जैसी पीड़ितों की कहानियाँ उस व्यवस्थागत क्रूरता को दर्शाती हैं जिसने सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के नाम पर मातृत्व का अपमान किया।

  • 1949 और 1976 के बीच लगभग 250,000 महिलाओं के बच्चों को जबरन गोद देने के लिए मजबूर किया गया।
  • सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक संस्थाओं ने 'अविवाहित माताओं' को अपात्र मानकर उनके बच्चों को छीन लिया।
  • ब्रिटिश सरकार ने इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए औपचारिक माफी मांगी है।

ब्रिटेन का इतिहास एक ऐसे गहरे घाव को समेटे हुए है जिसे दशकों तक दबाकर रखा गया। हाल ही में बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री, 'Stolen Babies', ने उस भयावह दौर की याद दिलाई है जब राज्य और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर हजारों माताओं के जीवन को तहस-नहस कर दिया। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लगभग 250,000 महिलाओं की है जिन्हें उनके बच्चों से अलग कर दिया गया था।

मैरियन मैकमिलन की कहानी इस त्रासदी का एक जीवंत उदाहरण है। 1966 में, मात्र 17 वर्ष की आयु में, मैरियन एक पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध में थीं। उस दौर के नस्लीय पूर्वाग्रहों और सामाजिक दबाव के कारण, उन्हें एक 'अविवाहित माँ' के रूप में देखा गया। उन्हें स्कॉटलैंड से दूर न्यूकैसल-अपॉन-टाइन के एक मैटरनिटी होम में भेज दिया गया, जहाँ का माहौल अत्यंत कठोर और अपमानजनक था।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत हानि का नहीं है, बल्कि यह संस्थागत नस्लवाद और वर्गभेद का एक स्पष्ट उदाहरण है। उस समय की व्यवस्था ने कामकाजी वर्ग की अविवाहित लड़कियों के बच्चों को मध्यम वर्ग के परिवारों को गोद देने के लिए एक 'कनवेयर बेल्ट' की तरह इस्तेमाल किया। यह दर्शाता है कि कैसे सत्ता और नैतिकता के नाम पर मानवाधिकारों का हनन किया गया।

"हमें बताया गया था कि हम माँ बनने के लायक नहीं हैं, और इसलिए हम अपने बच्चों को नहीं रख सकते।" - मैरियन मैकमिलन

मैरियन ने बताया कि प्रसव के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें अपने नवजात बेटे को केवल एक दिन बाद छूने की अनुमति मिली। जब उसका बेटा नौ महीने का हुआ, तो उसे गोद लेने वाले माता-पिता के पास भेज दिया गया। मैरियन के लिए वह क्षण किसी मृत्युदंड से कम नहीं था। हालांकि, 2004 में उनकी अपने बेटे से पुनर्मिलन हुई, लेकिन खोए हुए वर्षों की भरपाई कभी नहीं हो सकती।

इसी तरह की पीड़ा एन केन ने भी झेली, जिन्हें प्रसव के दौरान दर्द निवारक दवा देने से मना कर दिया गया क्योंकि उन्हें 'बदमाश लड़की' माना गया था। यह व्यवस्थागत क्रूरता उस समय की सामाजिक संरचना का हिस्सा थी, जहाँ नैतिकता के नाम पर महिलाओं को दंडित किया जाता था।

Did You Know?: ब्रिटेन में 1949 से 1976 के बीच जबरन गोद लेने (Forced Adoption) के मामलों में शामिल महिलाओं की संख्या अनुमानित 2.5 लाख है।

Frequently Asked Questions

1. क्या ब्रिटिश सरकार ने इस मुद्दे पर कोई कदम उठाया है?
हाँ, प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने इन माताओं से औपचारिक रूप से माफी मांगते हुए कहा है कि 'शर्म आपकी नहीं, हमारी है।'

2. किन संस्थाओं की इसमें मुख्य भूमिका थी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता, धार्मिक संगठन (जैसे साल्वेशन आर्मी) और तत्कालीन राज्य व्यवस्था ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी।