काले सागर में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अनाज टर्मिनलों पर हमलों और वैश्विक स्तर पर सूखे ने गेहूं की कीमतों को तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।
- रूस और यूक्रेन ने ब्लैक सी (काले सागर) के अनाज टर्मिनलों पर हमले तेज किए हैं, जिससे वैश्विक निर्यात बाधित हुआ है।
- अमेरिका, कनाडा और यूरोप में सूखे और भीषण गर्मी के कारण गेहूं के उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या गेहूं की उपलब्धता की नहीं, बल्कि उसकी 'किफायती क्षमता' (Affordability) की है।
वैश्विक कृषि बाजार इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। गेहूं की कीमतों में अचानक आई तेजी का मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते मौसम के मिजाज हैं। रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है और यूक्रेन शीर्ष 10 उत्पादकों में शामिल है। इन दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है।
शिकागो गेहूं वायदा (Chicago wheat futures), जो वैश्विक बेंचमार्क है, हाल ही में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। रूस के रोस्तोव क्षेत्र में आपातकाल घोषित किया गया है क्योंकि बंदरगाहों के बंद होने और नौवहन बाधाओं के कारण खेतों में कृषि उत्पादों का ढेर लग गया है, जिन्हें निर्यात नहीं किया जा पा रहा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं है, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक प्रणालीगत खतरा है। जब दुनिया के दो सबसे बड़े 'अन्न भंडार' एक-दूसरे के बुनियादी ढांचे को नष्ट करते हैं, तो शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ जाते हैं। इसका सीधा असर अफ्रीका और एशिया के उन देशों पर पड़ता है जो पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं।
तबाही का स्तर चौंकाने वाला है। यूक्रेन के बुनियादी ढांचा मंत्रालय के अनुसार, अकेले जुलाई में बंदरगाहों पर जहाजों पर 35 हमले और बंदरगाह सुविधाओं पर 67 हमले हुए। यूक्रेन के कृषि मंत्री ने चेतावनी दी है कि रूसी हमलों ने रिटेलर्स के लगभग 90% खाद्य लॉजिस्टिक्स को नष्ट कर दिया है।
"रूस और यूक्रेन में पर्याप्त गेहूं है, और अंततः वह बाजार तक पहुंचेगा। लेकिन फिलहाल यह नहीं पहुंच पा रहा है, या बहुत अधिक लागत के साथ आ रहा है।" - जो ग्लॉबर, इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट।
युद्ध के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन ने भी आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, ग्रेट प्लेन्स राज्यों में व्यापक सूखे के कारण इस साल की पैदावार 2015 के बाद सबसे कम हो सकती है। इसी तरह, कनाडा के उत्पादन में 13% की गिरावट का अनुमान है, और यूरोप में हीटवेव ने अनाज की फसल को लगभग 9 मिलियन टन कम कर दिया है।
| क्षेत्र | गिरावट का मुख्य कारण | अनुमानित प्रभाव |
|---|---|---|
| ब्लैक सी (रूस/यूक्रेन) | सैन्य हमले/बंदरगाह बंदी | शिपिंग लागत में वृद्धि और लॉजिस्टिक्स ठप |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | भीषण सूखा | 2015 के बाद सबसे कम पैदावार |
| यूरोपीय संघ | भीषण हीटवेव | -9 मिलियन टन उत्पादन |
बड़े आयातक देश पहले से ही इस दबाव को महसूस कर रहे हैं। मिस्र, जो अपने स्टॉक का 82% से अधिक रूस और यूक्रेन से लेता है, और इंडोनेशिया, जो अब बुल्गारिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे वैकल्पिक देशों की तलाश कर रहा है, गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या दुनिया में गेहूं की कमी हो गई है?
उत्तर: जरूरी नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं मौजूद है, लेकिन युद्ध क्षेत्रों से परिवहन की उच्च लागत और सूखे के कारण उत्पादन घटने से यह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया है।
प्रश्न: एशियाई देश इस मूल्य वृद्धि पर कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं?
उत्तर: इंडोनेशिया जैसे देश अपने आयात स्रोतों में विविधता ला रहे हैं और ब्लैक सी क्षेत्र के बजाय ऑस्ट्रेलिया, रोमानिया और अर्जेंटीना की ओर रुख कर रहे हैं।