गुजरात के एक मछुआरे की कराची के अस्पताल में मौत हो गई, जबकि वह अपनी सजा पूरी करने के कई साल बाद भी जेल में था। इस साल यह दूसरा मामला है, जिसने 200 भारतीय कैदियों की रिहाई की मांग को तेज कर दिया है।

  • गुजरात के उना क्षेत्र के एक मछुआरे की 27 अगस्त को कराची के अस्पताल में मृत्यु हो गई।
  • मृतक ने मार्च 2022 में अपनी सजा पूरी कर ली थी, लेकिन फिर भी चार साल तक जेल में रखा गया।
  • वर्तमान में लगभग 197 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में हैं, जिनमें से 177 अपनी सजा पूरी कर चुके हैं।

एक हृदयविदारक घटना में, गुजरात के उना क्षेत्र के एक मछुआरे की 27 अगस्त को पाकिस्तान के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना की सबसे गंभीर बात यह है कि संबंधित मछुआरे ने मार्च 2022 में ही अपनी कानूनी सजा पूरी कर ली थी, लेकिन उसे चार साल और हिरासत में रखा गया।

इस मामले का खुलासा मुंबई स्थित शांति कार्यकर्ता और पत्रकार जतिन देसाई ने किया। देसाई लंबे समय से पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह इस साल का दूसरा ऐसा मामला है; इससे पहले 16 जनवरी को भी गुजरात के एक मछुआरे की पाकिस्तान की हिरासत में मौत हुई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि मछुआरों की हिरासत अक्सर कानूनी सजा से आगे बढ़कर एक भू-राजनीतिक सौदेबाजी का जरिया बन जाती है। भारत द्वारा सद्भावना के तौर पर कैदियों की रिहाई के बावजूद, पाकिस्तान द्वारा उन भारतीयों को रोके रखना जिनकी राष्ट्रीयता पहले ही सत्यापित हो चुकी है, एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा है।

सजा पूरी होने के बाद भी कैदियों को हिरासत में रखना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों और बुनियादी कानूनी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, लगभग 197 भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। इनमें से 177 ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और केवल रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में 29 अगस्त को अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए 8 मछुआरों सहित 25 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया था।

पाकिस्तान इंडिया पीपल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी (PIPFPD) और नेशनल फिशवर्कर्स फोरम (NFF) ने अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दोनों देशों से अपील की थी कि वे स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों का उपयोग इन मछुआरों को मुक्त करने के लिए करें।

मृतक मछुआरे का पार्थिव शरीर लगभग एक महीने बाद गुजरात पहुंचेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच कई आधिकारिक और राजनयिक औपचारिकताएं पूरी होनी बाकी हैं।

क्या आप जानते हैं?: भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा दुनिया के सबसे विवादित क्षेत्रों में से एक है, जहाँ अक्सर आधुनिक जीपीएस तकनीक की कमी के कारण मछुआरे अनजाने में सीमा पार कर जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: वर्तमान में कितने भारतीय मछुआरे पाकिस्तानी जेलों में हैं?
कार्यकर्ता जतिन देसाई के अनुसार, लगभग 197 भारतीय मछुआरे वर्तमान में पाकिस्तान में हिरासत में हैं।

प्रश्न 2: सजा पूरी होने के बाद भी मछुआरों को क्यों नहीं छोड़ा जाता?
अक्सर राष्ट्रीयता के सत्यापन में देरी या दोनों देशों के बीच राजनयिक दबाव के कारण रिहाई में समय लगता है।