नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद जलविद्युत परियोजनाओं पर काम करने वाले 933 कर्मचारी लापता हैं। बचाव दल सुरंगों में फंसे सैकड़ों लोगों तक पहुँचने के लिए भारत और चीन की मदद से संघर्ष कर रहे हैं।
- 933 जलविद्युत परियोजना कर्मचारी लापता, जिनमें से 600 से अधिक सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
- भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें बचाव अभियान में नेपाल की मदद कर रही हैं।
- अपर त्रिशुली-1 परियोजना सबसे अधिक प्रभावित, यहाँ 500 से अधिक लोग संपर्क से बाहर हैं।
- कुल मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,500 लोग लापता।
नेपाल के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार, विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं से 933 कर्मचारी और कर्मचारी लापता हैं। अधिकारियों का मानना है कि इनमें से एक बड़ी संख्या अभी भी उन सुरंगों के भीतर दबे हो सकते हैं जिन्हें मलबे और पानी ने पूरी तरह ढक दिया है।
यह आपदा संभवतः नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने (हिमस्खलन) के कारण उत्पन्न हुई, जिससे भोटकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ गया। इस जलप्रलय ने न केवल घरों और पुलों को बहा दिया, बल्कि निर्माणाधीन बुनियादी ढांचों को भी तहस-नहस कर दिया। अब तक 279 लोगों को सुरंगों से सुरक्षित निकाला जा सका है, लेकिन सैकड़ों की स्थिति अभी भी अज्ञात है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह घटना हिमालयी क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकास और जलवायु जोखिमों के बीच के संघर्ष को उजागर करती है। जब बड़े पैमाने पर सुरंग निर्माण जैसे प्रोजेक्ट्स पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में किए जाते हैं, तो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान 'एग्जिट पॉइंट्स' का बंद होना मौत के जाल में बदलने जैसा होता है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्वतीय बुनियादी ढांचे के सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाता है।
"पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल का अभाव ऐसी त्रासदियों को और अधिक घातक बना देता है।"
नवाकोट जिले में, नेपाली सेना के इंजीनियर भारी मशीनरी और विस्फोटकों (blasting) का उपयोग कर रहे हैं ताकि अपर त्रिशुली-3A परियोजना की सुरंग तक पहुँचा जा सके। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 90 सदस्यीय संयुक्त टीम तैनात है, जिसमें प्रशिक्षित कुत्तों वाली विशेष खोज दल भी शामिल है। हालांकि, सुरंग के 'क्राउन हेड' में एक छोटा छेद करने के बाद भी अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे उम्मीदें कम होती जा रही हैं।
बचाव कार्य की जटिलता को देखते हुए, नेपाली सेना ने भारी उत्खननकर्ताओं (excavators) और बुलडोजरों को हेलीकॉप्टर के जरिए टुकड़ों में ले जाकर मौके पर पहुँचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरंग का मुख ऊर्ध्वाधर छेद से लगभग 40 मीटर ऊपर की ओर पाया गया है, लेकिन मलबे की गहराई अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
| परियोजना स्थल | लापता/संपर्क विहीन संख्या |
|---|---|
| अपर त्रिशुली-1 | 500+ |
| अपर त्रिशुली-3B | 213 |
| रसुवागढ़ी | 93 |
| लंगटंग खोला | 42 |
Frequently Asked Questions
1. कितने लोग अब तक लापता हैं?
कुल 4,500 लोग लापता हैं, जिनमें से 933 विशेष रूप से जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी हैं।
2. बचाव अभियान में कौन मदद कर रहा है?
नेपाली सेना और पुलिस के साथ-साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी बचाव कार्य में सहायता कर रही हैं।