प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, हालांकि सूत्रों के अनुसार उनके बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की संभावना नहीं है। यह घटनाक्रम भारत-चीन सीमा विवाद के बीच हो रहा है।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग किर्गिस्तान के बिश्केक में 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।
- दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की संभावना नहीं है।
- पीएम मोदी व्लादिमीर पुतिन और मसूद पेज़ेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें करेंगे।
- विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से सीमा विवाद पर चर्चा जारी है।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों इस बहुपक्षीय मंच पर मौजूद रहेंगे, लेकिन सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस यात्रा के दौरान उनके बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को बिश्केक पहुंचे, जहां किर्गिस्तान के कैबिनेट मंत्रियों के अध्यक्ष और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख अदिलबेक कासिमलिएव ने उनका स्वागत किया। अपने आगमन के तुरंत बाद, पीएम मोदी ने महात्मा गांधी स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि इस स्मारक का अनावरण प्रधानमंत्री ने 2015 की अपनी यात्रा के दौरान किया था, जो वैश्विक स्तर पर शांति और अहिंसा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि मोदी और शी का एक ही मंच पर होना लेकिन औपचारिक बैठक से बचना, भारत-चीन संबंधों में वर्तमान 'नपे-तुले तनाव' को दर्शाता है। हालांकि दोनों देश विशेष प्रतिनिधियों के तंत्र के माध्यम से सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उच्च स्तरीय शिखर वार्ता का अभाव यह बताता है कि विश्वास अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है। एससीओ एक 'तटस्थ जमीन' प्रदान करता है जहां बिना किसी राजनीतिक जोखिम के बातचीत की जा सकती है।
एससीओ शिखर सम्मेलन एक कूटनीतिक बैरोमीटर की तरह है; औपचारिक बैठक के बिना मंच साझा करना सक्रिय शत्रुता से हटकर एक 'प्रबंधित गतिरोध' की ओर बढ़ने का संकेत है।
एससीओ एक विशाल संगठन है जिसमें 10 सदस्य देश, 15 भागीदार देश और दो पर्यवेक्षक देश शामिल हैं। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला और यूरेशिया में आर्थिक एकीकरण होना है। भारत के लिए, यह शिखर सम्मेलन अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को संतुलित करने और विभिन्न भागीदारों के साथ जुड़ने का एक अवसर है।
मुख्य कार्यक्रम के इतर, पीएम मोदी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ चर्चा शामिल है, जो भारत की 'बहु-संरेखित' विदेश नीति को उजागर करता है। इन बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा और मध्य एशिया में कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सितंबर का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। बिश्केक के बाद, वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और संभवतः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बैठक के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बिश्केक में पीएम मोदी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे?
वे दोनों एससीओ शिखर सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे, लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक निर्धारित नहीं है।
एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और किन नेताओं से मिलेंगे?
प्रधानमंत्री मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं।