नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने 15 जलविद्युत परियोजनाओं में 639 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। इस बीच, एक ऑस्ट्रियाई कंपनी ने अपने 150 लापता कर्मचारियों को खोजने के लिए काठमांडू में एक निजी 'वॉर रूम' स्थापित किया है।
- 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद 15 जलविद्युत परियोजनाओं से 639 लोग लापता हैं।
- ऑस्ट्रियाई कंपनी 'एंड्रिट्ज़' (Andritz) ने अपने 150 भारतीय और नेपाली कर्मचारियों की खोज के लिए काठमांडू में एक विशेष हब बनाया है।
- भारी बारिश, इंटरनेट की कमी और बुनियादी ढांचे के विनाश के कारण बचाव कार्य में भारी बाधाएं आ रही हैं।
काठमांडू के केंद्र में एक होटल के कमरे में तनाव का माहौल है। कॉफी टेबल को जोड़कर एक कॉन्फ्रेंस टेबल बनाई गई है और दीवार पर अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के आसपास के क्षेत्र का नक्शा प्रोजेक्ट किया गया है। यह ऑस्ट्रियाई कंपनी एंड्रिट्ज़ का 'वॉर रूम' है, जिसके लगभग 150 कर्मचारी इस आपदा में लापता हैं। कंपनी अपने उन भारतीय और नेपाली कर्मियों को खोजने की कोशिश कर रही है जो पांच दिनों से लापता हैं।
26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने पूरे इलाके को तबाह कर दिया। अपर त्रिशूली-1 परियोजना, जिसकी क्षमता 216 मेगावाट थी और जो भोटे कोशी नदी कॉरिडोर की सबसे बड़ी परियोजना बनने वाली थी, अब मलबे के ढेर में बदल चुकी है। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, कुल 15 जलविद्युत परियोजनाओं से 639 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें से कई परियोजनाएं निर्माणाधीन थीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आपदा तैयारियों की भारी कमी को उजागर करती है। जब एक निजी कंपनी को अपने लापता कर्मचारियों को खोजने के लिए खुद का 'वॉर रूम' बनाना पड़े, तो यह संकेत देता है कि सरकारी बचाव तंत्र औद्योगिक स्थलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त हो सकते हैं। संकट के समय बुनियादी डिजिटल कनेक्टिविटी का अभाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
बचाव अभियान में कई बाधाएं हैं। नेपाली सेना अपनी खोज जारी रखे हुए है, लेकिन एंड्रिट्ज़ कंपनी ने भी अपने स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। कंपनी ने फंसे हुए श्रमिकों तक भोजन पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर किराए पर लिए थे, लेकिन भारी बारिश ने इन उड़ानों को बाधित कर दिया है। अब कंपनी की योजना 4x4 वाहनों और पैदल ट्रेकिंग के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने की है।
हिमालय में जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली अचानक बाढ़ और उच्च-घनत्व वाले औद्योगिक निर्माण का मेल एक ऐसा जोखिम पैदा करता है, जिसके लिए वर्तमान सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार नहीं हैं।
तकनीकी विफलताएं भी इस मिशन में बाधा बन रही हैं। वॉर रूम में मौजूद टीम होटल के खराब वाई-फाई और कमजोर मोबाइल सिग्नल से जूझ रही है। यहां तक कि गूगल अर्थ (Google Earth) की सशुल्क सेवाओं के लिए क्रेडिट कार्ड के अंतरराष्ट्रीय भुगतान न होने के कारण वास्तविक समय की तस्वीरें प्राप्त करने में देरी हुई। यह दिखाता है कि आपदा के समय सरल तकनीकी संसाधन भी कितने महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
कंपनी के अधिकारियों का ध्यान अब उन पांच प्रमुख स्थानों पर है जहां जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना सबसे अधिक है, जिनमें कैंप साइट और टनल इनलेट शामिल हैं। जैसे-जैसे बाढ़ को एक सप्ताह पूरा होने को है, उम्मीदें कम हो रही हैं, लेकिन खोज जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नेपाल की बाढ़ में कुल कितने लोग लापता हैं?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं से कुल 639 लोग लापता हैं।
प्रश्न 2: इस स्थिति में एंड्रिट्ज़ कंपनी की क्या भूमिका है?
एंड्रिट्ज़ एक ऑस्ट्रियाई सब-कॉन्ट्रैक्टर है जो मशीनरी की आपूर्ति करती है; उसने अपने 150 लापता भारतीय और नेपाली कर्मचारियों को खोजने के लिए एक निजी सर्च हब बनाया है।