किर्गिस्तान के बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो गई है, जहाँ पीएम मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन जैसे दिग्गज नेता क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर चर्चा करेंगे।

  • 26वां SCO शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है।
  • पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन सहित कई वैश्विक नेता इसमें भाग ले रहे हैं।
  • शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक कनेक्टिविटी है।
  • SCO इस वर्ष अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आज से 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे शक्तिशाली वैश्विक नेताओं के एक मंच पर आने से पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं। यह शिखर सम्मेलन तब हो रहा है जब यह संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद बिश्केक पहुंचे। उनका स्वागत किर्गिस्तान के कैबिनेट मंत्रियों और पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन के साथ किया गया। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंजीत जयसवाल ने बताया कि यह शिखर सम्मेलन क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दस सदस्य देशों और कई भागीदार देशों को एक साथ लाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक बैठक नहीं है, बल्कि एक बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य का प्रतीक है। एक तरफ यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया का संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी ओर SCO के माध्यम से चीन और रूस एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के लिए, यह मध्य एशिया में अपनी रणनीतिक पहुंच बढ़ाने और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

SCO का मंच क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है, जो वैश्विक अस्थिरता के दौर में अत्यंत आवश्यक है।

इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन (31 अगस्त - 1 सितंबर) में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और परिवहन कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत-चीन संबंधों में हालिया सुधारों के बाद, मोदी और शी के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर भी वैश्विक विशेषज्ञों की कड़ी नजर रहेगी।

SCO का ऐतिहासिक सफर

SCO की नींव 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा रखी गई थी। इसकी शुरुआत 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य सीमा विवादों को सुलझाना और सैन्य तनाव को कम करना था। 2017 में भारत और पाकिस्तान इसके पूर्ण सदस्य बने, और हाल ही में ईरान और बेलारूस ने भी इसमें शामिल होकर इसकी शक्ति को और बढ़ाया है।

विशेषताशुरुआती दौर (Shanghai Five)वर्तमान SCO (2026)
सदस्य देश510
प्रमुख फोकससीमा विवाद समाधानसुरक्षा, व्यापार और डिजिटल सहयोग
वैश्विक प्रभावक्षेत्रीयवैश्विक भू-राजनीतिक शक्ति
Did You Know?: SCO दुनिया की लगभग 40% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे यह एक अत्यंत प्रभावशाली वैश्विक मंच बन जाता है।

Frequently Asked Questions

1. SCO शिखर सम्मेलन 2026 कहाँ आयोजित हो रहा है?
यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है।

2. इस शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे क्या हैं?
मुख्य एजेंडे में आतंकवाद विरोधी अभियान, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी शामिल हैं।