प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं, जहां वे एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस बैठक में भारत, रूस और चीन के बीच आतंकवाद, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
- प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक, किर्गिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे।
- आतंकवाद का मुकाबला और ऊर्जा सुरक्षा शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे हैं।
- रूस, चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को संतुलित करने का प्रयास।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस मंच पर दुनिया की तीन सबसे बड़ी शक्तियों—भारत, चीन और रूस—के नेता एक साथ मौजूद होंगे। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में आतंकवाद का मुकाबला सर्वोपरि है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद के किसी भी रूप को सहन नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से जब सीमा पार आतंकवाद क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विस्तृत चर्चा होगी, ताकि सदस्य देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक भू-राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश है। एक तरफ जहां चीन और रूस के संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं, वहीं भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को बनाए रखते हुए इस समूह में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है।
"SCO का महत्व अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प के रूप में एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक कदम है।"
कनेक्टिविटी के मुद्दे पर भी गहन बहस होने की संभावना है। भारत ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता का सम्मान करने वाली कनेक्टिविटी का समर्थन किया है, जो कि चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के प्रति भारत के रुख को स्पष्ट करता है। बिश्केक में होने वाली यह बैठक यह तय करेगी कि आने वाले समय में मध्य एशिया में निवेश और व्यापार का प्रवाह किस दिशा में होगा।
ऐतिहासिक रूप से, SCO ने सदस्य देशों के बीच विश्वास की कमी और सीमा विवादों के कारण चुनौतियों का सामना किया है। हालांकि, हाल के वर्षों में आर्थिक एकीकरण और साझा निवेश के माध्यम से इन मतभेदों को पाटने की कोशिश की गई है। इस बार की बैठक में डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
Frequently Asked Questions
1. एससीओ (SCO) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
2. बिश्केक यात्रा के दौरान पीएम मोदी का मुख्य फोकस क्या होगा?
पीएम मोदी का मुख्य फोकस आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना होगा।