अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट के जरिए समुद्री सुरंगें बिछाने की ईरानी कोशिशों को रोकने के लिए लारक द्वीप पर हमले किए हैं, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया है।
- अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगों की तैनाती रोकने के लिए लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया।
- IRGC ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
- विशेषज्ञों के बीच इस बात पर बहस जारी है कि क्या रॉकेट के जरिए सुरंगें बिछाना तकनीकी रूप से संभव है।
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक महीने से जारी शांति का दौर रविवार को तब टूट गया जब अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई तेहरान को रॉकेटों के माध्यम से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री बारूदी सुरंगें (sea mines) बिछाने से रोकने के लिए की गई थी।
सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि अमेरिकी सेना, जो वर्तमान में होर्मुज के आसपास के ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रही है, ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को समुद्री सुरंगों से लैस रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा था। ईरान ने इस हमले को "आक्रामकता का कार्य" करार दिया है और IRGC ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी हमलों में कम से कम दो लोग मारे गए और दो घायल हुए हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना 'असममित युद्ध' (asymmetric warfare) की एक खतरनाक दिशा को दर्शाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जीवनरेखा है; यहां किसी भी तरह की सुरंग बिछाने की सफल कोशिश से वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। अमेरिका केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि वह ईरान को ऐसी क्षमता विकसित करने से रोकना चाहता है जिससे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना सके।
तकनीकी रूप से, रॉकेट के जरिए सुरंगें बिछाना विवादास्पद है। सेवानिवृत्त अमेरिकी नौसेना अधिकारी हारलन उलमैन ने इस दावे को "असंभव" बताया। उनका तर्क है कि जब एक रॉकेट पानी से टकराता है, तो उसकी गति इतनी अधिक होती है कि वह सुरंग के संवेदनशील तंत्र को नष्ट कर देगा। हालांकि, ईरान अपनी पारंपरिक हथियारों को नई जरूरतों के अनुसार ढालने में माहिर है।
"ईरान की असममित युद्ध रणनीति उन्हें मानक आर्टिलरी सिस्टम को रणनीतिक नौसैनिक खतरों में बदलने की अनुमति देती है, जो पारंपरिक नौसैनिक सिद्धांतों को चुनौती देता है।"
ऐतिहासिक रूप से, ईरान ने छोटी और तेज हमलावर नावों का उपयोग किया है। लेकिन जनवरी 2025 में, ईरानी राज्य टेलीविजन ने फजर-5 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) का उपयोग करके समुद्री सुरंगें बिछाने का प्रदर्शन किया था। फजर-5 एक 333 मिमी मध्यम दूरी की प्रणाली है जिसकी रेंज 75 किमी है, जबकि इसके नए वेरिएंट फजर-5c की रेंज 130 किमी तक है। इसका मतलब है कि ईरान तट से ही पूरे जलडमरूमध्य को सुरंगों से भर सकता है।
| तैनाती का तरीका | जोखिम स्तर | पहुंच/रेंज | अमेरिकी जवाबी कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| तेज हमलावर नावें | उच्च (हवाई हमलों के प्रति संवेदनशील) | कम/स्थानीय | सीधा अवरोधन |
| फजर-5 रॉकेट | कम (जमीन से लॉन्च) | 130 किमी तक | निवारक जमीनी हमले |
| पनडुब्बी/जहाज | मध्यम | रणनीतिक/व्यापक | माइन स्वीपर्स (Avenger-class) |
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि CENTCOM ने जलडमरूमध्य की सफाई पूरी कर ली है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंगों को हटाना एक अत्यंत धीमी प्रक्रिया है, जिसके लिए एवेंजर-क्लास माइन डिस्ट्रॉयर्स जैसे विशेष जहाजों की आवश्यकता होती है, जो चुंबकीय कंपन को कम करने के लिए विशेष सामग्रियों से बने होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: फजर-5 रॉकेट सिस्टम क्या है?
उत्तर: यह ईरान का एक 333 मिमी मध्यम दूरी का रॉकेट सिस्टम है, जिसे मुख्य रूप से जमीनी लक्ष्यों के लिए बनाया गया था, लेकिन अब IRGC इसका उपयोग समुद्री सुरंगें बिछाने के लिए कर रहा है।
प्रश्न 2: होर्मुज जलडमरूमध्य रणनीतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर: यह फारस की खाड़ी से दुनिया के बाकी हिस्सों में निर्यात होने वाले तेल का प्राथमिक मार्ग है; यहां कोई भी रुकावट वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।