प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में आयोजित 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति या 'रणनीतिक संपत्ति' के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता।

  • आतंकवाद को 'रणनीतिक संपत्ति' के रूप में उपयोग करने वाले देशों पर कड़ा प्रहार।
  • आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और कट्टरपंथ के नेटवर्क को खत्म करने की मांग।
  • पश्चिम एशिया संकट और अफगानिस्तान की स्थिरता पर वैश्विक चिंता व्यक्त की।
  • नशीली दवाओं की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ गहन सहयोग का आह्वान।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक सुरक्षा पर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। पीएम मोदी ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद के उस पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए एकजुट हों, जो दुनिया की शांति के लिए खतरा बना हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से उन देशों की ओर इशारा किया जो आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के एक औजार या 'रणनीतिक संपत्ति' के रूप में उपयोग करते हैं।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में 'दोहरे मानकों' (Double Standards) के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि आतंकवाद के प्रति चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाना न केवल खतरनाक है, बल्कि यह आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि भर्ती, कट्टरपंथ और फंडिंग के नेटवर्क को जड़ से मिटाना होगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that PM Modi's rhetoric at the SCO summit is a calculated diplomatic move to isolate state-sponsored terrorism, particularly targeting the nexus that operates within the region. By linking regional stability in Afghanistan to the broader security of Eurasia, India is positioning itself as a responsible stakeholder that prioritizes long-term peace over short-term geopolitical gains.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि निवारक होनी चाहिए ताकि भविष्य के खतरों को जन्म लेने से पहले ही रोका जा सके।

पीएम मोदी ने अफगानिस्तान की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि यूरेशिया की शांति और सुरक्षा सीधे तौर पर वहां की स्थिरता से जुड़ी है। भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और विकास कार्यों के माध्यम से समर्थन देना जारी रखा है और भविष्य में भी ऐसा करता रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष केवल एक भूगोल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है, जिससे 'ग्लोबल साउथ' के देश सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

सुरक्षा के साथ-साथ, प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं की तस्करी को युवाओं के लिए एक गंभीर खतरा बताया। उन्होंने एससीओ प्लेटफॉर्म का उपयोग संगठित अपराध और सूचना सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी समन्वय चैनल बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और किसानों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है।

क्या आप जानते हैं?: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन है, जो वैश्विक भूमि क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को कवर करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: पीएम मोदी ने आतंकवाद के संबंध में 'दोहरे मानकों' का उल्लेख क्यों किया?
उत्तर: उन्होंने संकेत दिया कि कुछ देश आतंकवाद के खिलाफ बात तो करते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे आतंकवादियों को शरण और समर्थन देना जारी रखते हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए घातक है।

प्रश्न 2: एससीओ शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी किसने की?
उत्तर: इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव ने बिश्केक में की।