अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन और यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
- अमेरिका ने समुद्री मार्गों में माइन बिछाने से रोकने के लिए लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया।
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन और यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- 호र्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए मुख्य संघर्ष बिंदु बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को "कड़ी" चोट पहुंचाने की चेतावनी दी है, जो हफ्तों के बाद दोनों देशों के बीच हुई पहली सीधी सैन्य झड़प के बाद आया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर हमले किए। वाशिंगटन का दावा है कि यह कार्रवाई ईरान को महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में समुद्री बारूदी सुरंगें (mines) बिछाने से रोकने के लिए की गई थी।
ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन दागे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि जॉर्डन के दो अमेरिकी हवाई अड्डों को "भारी नुकसान" पहुंचा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि लगभग सभी मिसाइलें हवा में ही मार गिराई गईं। जॉर्डन की सेना ने आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह सैन्य टकराव केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक 'आर्थिक युद्ध' का हिस्सा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया के तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है, एक रणनीतिक युद्धक्षेत्र बन गया है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी और ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रयासों से वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है, जिसका असर अमेरिकी मतदाताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सैन्य आक्रामकता के बीच, ईरान के भीतर विरोधाभासी संकेत मिल रहे हैं। जहाँ रिवोल्यूशनरी गार्ड्स युद्ध के मूड में हैं, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने किर्गिस्तान में एक शिखर सम्मेलन के दौरान संवाद का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युद्ध जारी रखना न तो ईरान के हित में है और न ही क्षेत्र के हित में।
यह 'हमला और जवाबी हमला' का चक्र एक उच्च-जोखिम वाला जुआ है, जहाँ दोनों देश एक-दूसरे की सहनशक्ति की परीक्षा ले रहे हैं।
आर्थिक मोर्चे पर, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति को जारी रखने की बात कही है। नॉर्थ कैरोलिना में G20 बैठक के दौरान बेसेंट ने संकेत दिया कि ईरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने का यह अभियान अगले कुछ हफ्तों या महीनों में निर्णायक मोड़ ले सकता है।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं। अमेरिकी नौसेना का कहना है कि उनका जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण है और उन्होंने विस्फोटक हटा दिए हैं। इसके विपरीत, ईरान का दावा है कि एक तेल टैंकर बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गया, जिसे अमेरिका ने "दुष्प्रचार" करार दिया है।
| विशेषता | अमेरिकी रुख | ईरानी रुख |
|---|---|---|
| होर्मुज जलडमरूमध्य | पूर्ण नियंत्रण और माइन क्लियरिंग का दावा | अपना अधिकार और सक्रिय माइन का दावा |
| सैन्य कार्रवाई | लारक द्वीप पर निवारक हमला | जॉर्डन/यूएई ठिकानों पर जवाबी हमला |
| रणनीति | आर्थिक युद्ध और अधिकतम दबाव | नाकाबंदी और समझौते की वापसी की मांग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अमेरिका ने लारक द्वीप पर हमला क्यों किया?
अमेरिका का कहना है कि ईरान को महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकने के लिए यह हमला जरूरी था।
2. शांति के लिए ईरान की मुख्य मांग क्या है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, संकट के समाधान के लिए अमेरिका को अपने पिछले वादों और परमाणु समझौते पर वापस लौटना होगा।