अक्टूबर चुनाव से पहले इजरायली मंत्रियों ने AI-जनरेटेड विज्ञापनों के जरिए फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत फैलाना शुरू कर दिया है, जबकि गाजा में हवाई हमलों और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार से तनाव चरम पर है।

  • इजरायली मंत्रियों द्वारा AI का उपयोग कर फिलिस्तीनियों को डराने वाले विज्ञापनों का प्रसार।
  • गाजा में 'लक्षित हमलों' के दावे के बीच आम नागरिकों और बच्चों की मौतें बढ़ीं।
  • वेस्ट बैंक में इजरायली सैनिकों और बसने वालों द्वारा समन्वित हमले और जबरन बेदखली।
  • अक्टूबर चुनाव के बाद गाजा सिटी को पुन: कब्जा करने की सैन्य योजना।

इजरायल में आगामी अक्टूबर चुनावों के करीब आने के साथ ही राजनीतिक माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गुट वर्तमान सर्वेक्षणों में पिछड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिणपंथी मंत्रियों ने अपनी चुनावी रणनीति को और अधिक आक्रामक बना लिया है। अब वे केवल नीतियों की बात नहीं कर रहे, बल्कि कब्जे और उत्पीड़न को ही अपने अभियान का मुख्य संदेश बना चुके हैं।

वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने एक विवादित AI-जनरेटेड विज्ञापन जारी किया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि वे नेगेव और गैलील क्षेत्रों (जहां बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी रहते हैं) में भी वही करेंगे जो उन्होंने वेस्ट बैंक में किया है—यानी यहूदी बस्तियों का निर्माण। उनके विज्ञापन का नारा "अहमद का डरना सही है" सीधे तौर पर फिलिस्तीनी आबादी में दहशत पैदा करने की कोशिश है।

वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने एक और AI वीडियो साझा किया, जिसमें फिलिस्तीनी कैदियों को एक असेंबली लाइन की तरह जेलों में प्रवेश करते और कुपोषित होकर निकलते दिखाया गया है। बेन-गवीर ने न केवल महिला कैदियों को अपमानित करने वाले वीडियो जारी किए, बल्कि पूर्वी जेरूसलम में UNRWA की सुविधाओं पर इजरायली झंडा लगाकर अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां उड़ाईं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल चुनावी बयानबाजी नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। जब राजनीतिक नेतृत्व AI का उपयोग नफरत फैलाने के लिए करता है, तो उसका सीधा असर जमीन पर हिंसा के रूप में दिखता है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि इजरायल में चरमपंथ अब मुख्यधारा की राजनीति का केंद्र बन चुका है, जिससे शांति की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

AI का उपयोग अब केवल तकनीकी प्रगति के लिए नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध और जातीय सफाए के प्रचार के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है।

गाजा की स्थिति और भी भयावह हो गई है। इजरायल ने पहले दावा किया था कि वे केवल हमास के 'कमांडरों' को निशाना बना रहे हैं, लेकिन हालिया हमलों में किसान, डिलीवरी ड्राइवर और बच्चे मारे गए हैं। 28 अगस्त को अल-करारा में एक ड्रोन हमले में अब्दिन परिवार के तीन सदस्य मारे गए, जबकि 30 अगस्त को एक बेकरी के पास हुए हमले में तीन साल का बच्चा भी मारा गया।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी हमले जारी हैं। अल-अकसा शहीदों अस्पताल के मेडिसिन वेयरहाउस पर ड्रोन हमले ने चिकित्सा आपूर्ति को बाधित कर दिया है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए दवाएं खत्म हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सैन्य नेतृत्व अब गाजा सिटी पर पूर्ण पुन: कब्जे को "अपरिहार्य" मान रहा है, जिसे चुनाव के बाद लागू किया जा सकता है।

वेस्ट बैंक में स्थिति किसी 'पोग्रोम' से कम नहीं है। अल-मुघय्यर और कुसरा जैसे गांवों में इजरायली सैनिकों और बस्तियों में रहने वाले उग्रवादियों ने मिलकर छापेमारी की, घरों को लूटा और निवासियों को गोली मारी। मानवाधिकार संगठन B’Tselem का कहना है कि यह हिंसा नियमित हो चुकी है और इसे इजरायली अधिकारियों का पूरा समर्थन प्राप्त है।

क्या आप जानते हैं?: गाजा में अक्टूबर 2023 से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 73,456 तक पहुंच गई है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मासूम बच्चों और महिलाओं का है।

Frequently Asked Questions

1. इजरायली मंत्री AI विज्ञापनों का उपयोग क्यों कर रहे हैं?
वे अक्टूबर चुनावों में अपने कट्टरपंथी आधार को मजबूत करने और फिलिस्तीनियों के खिलाफ डर का माहौल बनाकर अपनी राजनीतिक स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

2. गाजा सिटी के लिए इजरायल की नई सैन्य योजना क्या है?
सैन्य नेतृत्व का मानना है कि गाजा सिटी का पुन: कब्जा करना आवश्यक है, जिसके तहत निवासियों को नए 'मानवीय क्षेत्रों' में स्थानांतरित कर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया जाएगा।