जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने आर्थिक विकास को गति देने के लिए ओवरटाइम की समय सीमा पर लगी पाबंदियों को हटा दिया है, जिससे ट्रेड यूनियनों में भारी आक्रोश है।
- जापान ने मासिक ओवरटाइम के लिए 45 घंटे की सलाहकारी सीमा को समाप्त कर दिया है।
- प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का लक्ष्य श्रम की कमी को दूर करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- ट्रेड यूनियनों ने इसे 'करोशी' (काम के दबाव से मृत्यु) के जोखिम को बढ़ाने वाला कदम बताया है।
जापान की सरकार ने मंगलवार से ओवरटाइम नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची, जो स्वयं को एक 'वर्कहोलिक' (काम का जुनून रखने वाली) मानती हैं, के नेतृत्व में सरकार ने जुलाई में एक विकास रणनीति अपनाई थी। इस नई नीति के तहत अब श्रम मानक निरीक्षण कार्यालय कंपनियों पर मासिक 45 घंटे के ओवरटाइम कैप को मानने के लिए दबाव नहीं डालेंगे।
यह निर्णय मुख्य रूप से उन व्यावसायिक क्षेत्रों की मांग पर लिया गया है जो गंभीर श्रम संकट से जूझ रहे हैं। जापान के वाणिज्य और उद्योग चैंबर के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 20 प्रतिशत छोटे और मध्यम उद्यम, विशेष रूप से निर्माण, परिवहन और आतिथ्य (hospitality) जैसे क्षेत्रों में, पुराने नियमों के कारण अपनी गतिविधियों को सीमित महसूस कर रहे थे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम जापान की उस दीर्घकालिक लड़ाई के विपरीत है जो वह 'कॉर्पोरेट वॉरियर्स' की संस्कृति को बदलने के लिए लड़ रहा था। श्रम की कमी को दूर करने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बढ़ाना अल्पकालिक आर्थिक लाभ तो दे सकता है, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।
"ओवरटाइम नियमों में यह ढील आधुनिक कार्य-जीवन संतुलन की दिशा में जापान द्वारा उठाए गए पिछले सभी सकारात्मक कदमों को पीछे धकेलने जैसा है।"
ऐतिहासिक रूप से, जापान में अत्यधिक काम के कारण होने वाली मौतों को 'करोशी' (Karoshi) कहा जाता है। 2015 में विज्ञापन दिग्गज डेंटसु (Dentsu) के एक 24 वर्षीय कर्मचारी की आत्महत्या के बाद, देश ने कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance) को बेहतर बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए थे। वर्तमान में, लगभग 40 प्रतिशत कंपनियां ऐसे समझौतों के तहत काम कर रही हैं जो कानूनी रूप से 100 घंटे तक के ओवरटाइम की अनुमति देते हैं, लेकिन सरकार उन्हें 45 घंटे तक सीमित रखने की सलाह देती थी।
टोक्यो स्थित नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स (Zenroren) ने इस बदलाव को 'अस्वीकार्य' करार दिया है। उनका तर्क है कि यह नीति कर्मचारियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की अनदेखी करती है। हालांकि, श्रम मंत्रालय का दावा है कि वे कर्मचारियों की भलाई की निगरानी करना जारी रखेंगे और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने पर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
| विशेषता | पिछला मार्गदर्शन | नया नियम |
|---|---|---|
| ओवरटाइम सीमा (सलाह) | 45 घंटे प्रति माह | कोई दबाव नहीं |
| कानूनी अधिकतम सीमा | 100 घंटे (विशेष समझौतों के तहत) | 100 घंटे (अपरिवर्तित) |
| मुख्य उद्देश्य | कर्मचारी स्वास्थ्य (करोशी रोकना) | आर्थिक विकास और श्रम लचीलापन |
Frequently Asked Questions
1. क्या जापान में अब ओवरटाइम की कोई कानूनी सीमा नहीं है?
कानूनी सीमा अभी भी मौजूद है, लेकिन सरकार ने 45 घंटे की उस 'सलाहकारी सीमा' को हटा दिया है जिसका पालन कंपनियों से करवाया जाता था।
2. इस फैसले का विरोध क्यों हो रहा है?
ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इससे कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ेगा और 'करोशी' जैसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।