नेपाल में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ ने वैश्विक जलवायु वित्त पोषण की धीमी गति को उजागर कर दिया है। जबकि ग्लेशियर जोखिम परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में वर्षों लग गए, उधर संवेदनशील क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया।
- GCF को ग्लेशियर जोखिम परियोजना को मंजूरी देने में सात साल लगे।
- संवेदनशील नदी बेसिनों में जलविद्युत परियोजनाओं को वित्तीय समर्थन मिलता रहा।
- वित्त पोषण में देरी के कारण नेपाल के समुदाय जलवायु आपदाओं के प्रति असुरक्षित हो गए हैं।
नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने न केवल बुनियादी ढांचे को तबाह किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त पोषण तंत्र की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) को ग्लेशियरों से जुड़ी जोखिम प्रबंधन परियोजनाओं को मंजूरी देने में सात साल का लंबा समय लग गया, जिससे स्थानीय समुदायों को सुरक्षा कवच नहीं मिल सका।
यह देरी तब और भी चिंताजनक हो जाती है जब हम देखते हैं कि एक तरफ जलवायु अनुकूलन (adaptation) के लिए फंड मिलने में देरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता उन संवेदनशील नदी बेसिनों में बड़े पैमाने पर जलविद्युत परियोजनाओं (Hydropower projects) को वित्तपोषित कर रहे हैं जो पहले से ही जलवायु परिवर्तन के कारण अस्थिर हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वित्त पोषण का यह असंतुलन 'अनुकूलन बनाम शमन' (Adaptation vs Mitigation) की वैश्विक बहस को नया मोड़ देता है। जब तक विकासशील देश जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए तत्काल धन प्राप्त नहीं करते, तब तक बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास आपदाओं की तीव्रता को और बढ़ा सकता है।
जलवायु वित्त की सुस्त गति विकासशील देशों के लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न बन गई है।
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियरों का पिघलना और अचानक आने वाली बाढ़ (GLOF) एक निरंतर खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सात साल पहले ही फंड जारी कर दिया गया होता, तो आज नेपाल के पास बेहतर चेतावनी प्रणाली और सुरक्षात्मक संरचनाएं होतीं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील जलवायु हॉटस्पॉट में से एक है। पिछले कुछ दशकों में, तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं, जिससे नदियों के जलस्तर में अनिश्चितता बढ़ गई है और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: GCF क्या है?
उत्तर: ग्रीन क्लाइमेट फंड एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
प्रश्न 2: जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ के जोखिम को कैसे बढ़ाती हैं?
उत्तर: संवेदनशील बेसिनों में बड़े बांध और बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित कर सकता है, जिससे आपदा के समय नुकसान की संभावना बढ़ जाती है।