प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उजबेकिस्तान और किर्गिस्तान की अपनी सफल यात्रा समाप्त की। एससीओ शिखर सम्मेलन में उन्होंने आतंकवाद के इकोसिस्टम और उसके वित्तपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया।

  • भारत और उजबेकिस्तान के बीच 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' की स्थापना।
  • 2030 तक 5 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।
  • आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मानकों' को समाप्त करने की पीएम मोदी की सख्त चेतावनी।
  • रूस, ईरान और किर्गिस्तान के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को उजबेकिस्तान और किर्गिस्तान की अपनी दो देशों की महत्वपूर्ण यात्रा का समापन किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने किर्गिस्तान की राजधानी बिशकेक में आयोजित वार्षिक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लिया। वैश्विक मंच से पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद और उसके वित्तपोषण के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने के लिए सामूहिक कार्रवाई अनिवार्य है।

उजबेकिस्तान में अपनी यात्रा की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के साथ गहन चर्चा की। दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। आर्थिक मोर्चे पर, दोनों राष्ट्रों ने 2030 तक वार्षिक व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दौरान खनन और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, भारत और उजबेकिस्तान ने नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग के तहत उजबेकिस्तान से भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ढांचा तैयार करने पर सहमति व्यक्त की है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह कदम केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने की एक सोची-समझी कोशिश है। यूरेनियम आपूर्ति और व्यापार लक्ष्यों के माध्यम से भारत खुद को इस क्षेत्र के एक विश्वसनीय आर्थिक और सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है।

"आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड अपनाना अब संभव नहीं है; एससीओ को वित्तपोषण के स्रोतों को पूरी तरह बंद करना होगा।"

किर्गिस्तान में पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात की, जहाँ उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के तत्काल अंत और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। इसके अलावा, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ वार्ता में उन्होंने पश्चिम एशिया के तनाव को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की बात कही और व्यापारिक संबंधों को विविधता देने की इच्छा जताई।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को उजबेकिस्तान के प्रतिष्ठित 'ओलि डाराजली दोस्तलिक' (Oliy Darajali Do'stlik) ऑर्डर से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने इस सम्मान को भारत और उजबेकिस्तान के बीच के अटूट बंधन को समर्पित किया। उनकी विदाई बिशकेक हवाई अड्डे पर किर्गिस्तान के कैबिनेट मंत्री अदिलबेक कासिमालियेव ने की।

क्या आप जानते हैं?: उजबेकिस्तान दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है जो पूरी तरह से लैंडलॉक्ड (landlocked) हैं और जिनके चारों ओर केवल अन्य लैंडलॉक्ड देश ही हैं।
क्षेत्र उजबेकिस्तान लक्ष्य/परिणाम किर्गिस्तान/SCO फोकस
व्यापार $5 बिलियन (2030 तक) आर्थिक पूरकता
रणनीतिक व्यापक रणनीतिक साझेदारी आतंकवाद विरोधी ढांचा
ऊर्जा यूरेनियम आपूर्ति समझौता क्षेत्रीय स्थिरता

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से किस मुद्दे पर जोर दिया?
उन्होंने आतंकवाद के संपूर्ण इकोसिस्टम और उसके वित्तपोषण को समाप्त करने के लिए एकजुट कार्रवाई करने और इस मुद्दे पर दोहरे मानकों को छोड़ने का आह्वान किया।

2. भारत और उजबेकिस्तान के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या रखा गया है?
दोनों देशों ने 2030 तक वार्षिक व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।