भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बिश्केक घोषणापत्र का स्वागत करते हुए कहा है कि यह आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और एआई जैसे प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यह घोषणापत्र क्षेत्रीय सुरक्षा और तकनीकी सहयोग के नए युग की शुरुआत कर सकता है।

  • आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ वैश्विक एकजुटता पर जोर।
  • आतंकवाद को 'राज्य की नीति के उपकरण' के रूप में उपयोग करने की कड़ी निंदा।
  • एआई, ऊर्जा संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति।
  • SCO के आधिकारिक कामकाज में अंग्रेजी भाषा को शामिल करने का प्रस्ताव।

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए बिश्केक घोषणापत्र ने वैश्विक सुरक्षा और सहयोग के परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह घोषणापत्र नई दिल्ली की आतंकवाद विरोधी रणनीति, क्षेत्रीय सहयोग और तकनीकी साझेदारी के लक्ष्यों को मजबूती से प्रतिबिंबित करता है।

इस शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक शक्तिशाली संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद को कभी भी किसी देश के लिए 'रणनीतिक संपत्ति' नहीं माना जा सकता। उन्होंने उन देशों की कड़ी आलोचना की जो आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के एक उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घोषणापत्र केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि मध्य एशिया और यूरेशियाई क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मानकों' को खारिज करना भारत की कूटनीतिक जीत है, जो वैश्विक मंच पर आतंकवाद की परिभाषा को स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है।

आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए देशों को एकजुट होकर वित्तीय सहायता और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करना होगा।

घोषणापत्र के 13 प्रमुख परिणामों में यूनिवर्सल सेंटर फॉर काउंटरिंग चैलेंजेस की स्थापना शामिल है, जो आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने के लिए सूचना साझाकरण को मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, नशीली दवाओं की तस्करी और 'नार्को-टेररिज्म' के खिलाफ SCO एंटी-नारकोटिक्स सेंटर की कार्यकारी समिति के नियमों को भी मंजूरी दी गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

SCO की स्थापना 2001 में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा की गई थी। पिछले दो दशकों में, यह संगठन सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। भारत और पाकिस्तान के पूर्ण सदस्य बनने के बाद, इस समूह की भू-राजनीतिक प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

तकनीकी मोर्चे पर, भारत ने एआई (AI) और डिजिटल नवाचार में अपनी विशेषज्ञता साझा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही, अंग्रेजी को SCO की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव भारत जैसे अंग्रेजी बोलने वाले राष्ट्रों के लिए संस्थागत ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा।

Did You Know?: SCO (शंघाई सहयोग संगठन) इस वर्ष अपने स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है।

Frequently Asked Questions

1. बिश्केक घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और जलवायु व तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझा विकास सुनिश्चित करना है।

2. भारत को इस घोषणापत्र से क्या लाभ होगा?
यह भारत को मध्य एशिया में अपनी सुरक्षा स्थिति मजबूत करने, एआई तकनीक साझा करने और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एजेंडा सेट करने में मदद करेगा।