बिश्केक घोषणापत्र के माध्यम से SCO देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। सदस्य देशों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

  • SCO सदस्यों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • आतंकवादी समूहों का स्वार्थ के लिए उपयोग करने के प्रयासों को अस्वीकार्य बताया गया।
  • आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मापदंडों' की कड़ी आलोचना की गई।
  • ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों ने एक ऐतिहासिक 'बिश्केक घोषणापत्र' अपनाया है। इस घोषणापत्र में भारत, पाकिस्तान, ईरान, रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया है।

इस घोषणापत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में 'दोहरे मापदंडों' (Double Standards) पर प्रहार करना है। सदस्य देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आतंकवाद का मुकाबला करने में किसी भी प्रकार का भेदभाव या दोहरा रवैया स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद और आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) की केंद्रीय भूमिका का आह्वान किया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह घोषणापत्र भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है। इस बार SCO के मंच पर 'सीमा पार आतंकवाद' और 'दोहरे मापदंडों' का उल्लेख करना वैश्विक दबाव बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता तभी संभव है जब हम बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के सभी आतंकवादी समूहों को समान रूप से लक्षित करें।

घोषणापत्र में मध्य पूर्व, विशेष रूप से ईरान के आसपास के तनाव पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई है। सदस्य देशों ने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया और सैन्य हमलों की निंदा की, जिससे नागरिक हताहत हुए हैं। यह रुख तब महत्वपूर्ण है जब भारत के संबंध इजरायल के साथ मजबूत हैं, लेकिन SCO के सामूहिक मंच ने शांति और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

भू-राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में, जहाँ यूक्रेन और पश्चिम एशिया में युद्ध जारी हैं, SCO ने स्पष्ट किया कि वह कोई सैन्य-राजनीतिक गुट नहीं है। इसके विपरीत, संगठन खुलेपन, गैर-हस्तक्षेप और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर कार्य करता है। सदस्य देशों ने एक 'बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था' (Multipolar World Order) के निर्माण पर भी जोर दिया है।

Did You Know?: SCO दुनिया के लगभग 40% निवासियों का प्रतिनिधित्व करता है और यह यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

Frequently Asked Questions

1. बिश्केक घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक दोहरे मापदंडों को समाप्त करना है।

2. क्या SCO एक सैन्य गठबंधन है?
नहीं, घोषणापत्र के अनुसार SCO एक सैन्य-राजनीतिक गुट नहीं है, बल्कि यह खुलेपन और आपसी सम्मान पर आधारित एक संगठन है।