बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ महत्वपूर्ण संवाद किया, जबकि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के साथ संबंधों में भारी ठंडक देखी गई।

  • पीएम मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ संक्षिप्त मुलाकात की।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया।
  • पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के साथ कोई बातचीत या हैंडशेक नहीं हुआ।
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए 27 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने की संभावना।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति के केंद्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। औपचारिक फोटो सत्र से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर गहन चर्चा की। साथ ही, उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संक्षिप्त हैंडशेक किया, हालांकि आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की तैयारियों के कारण दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची के साथ भी मुलाकात की। इसके अलावा, उन्होंने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का अभिवादन किया और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को गले लगाया। इन मुलाकातों के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन में भारत का रुख 'संतुलित लेकिन सख्त' रहा है। एक तरफ जहां रूस और ईरान के साथ रणनीतिक गहराई बढ़ाई जा रही है, वहीं पाकिस्तान के प्रति भारत का रुख पूरी तरह से उदासीन रहा। यह दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर बिना किसी समझौते के आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में, प्रधानमंत्री मोदी ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर जैसे संवेदनशील समुद्री गलियारों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण नागरिक चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है।

"भारत का एससीओ में दृष्टिकोण अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापारिक हितों का नेतृत्व करने की दिशा में बढ़ रहा है।"

शिखर सम्मेलन के एजेंडे में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना' (RATS) के तहत आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर केंद्रित 27 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। भारत ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है।

दिलचस्प बात यह रही कि भारतीय प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। दोनों नेता गोलमेज सम्मेलन में एक-दूसरे से विपरीत छोर पर बैठे रहे, जो दोनों देशों के बीच मौजूदा तनावपूर्ण संबंधों का स्पष्ट संकेत था।

क्या आप जानते हैं?: एससीओ (SCO) दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

प्रश्न 1: पीएम मोदी ने समुद्री सुरक्षा के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की और नागरिक चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रश्न 2: क्या भारत और चीन के बीच कोई औपचारिक बैठक हुई?
उत्तर: नहीं, समय की कमी और भारत में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की योजना के कारण कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई, केवल संक्षिप्त अभिवादन हुआ।