एससीओ शिखर सम्मेलन में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का हवाला देते हुए कहा कि पानी क्षेत्र की जीवन रेखा है और इसे राजनीतिक दबाव का साधन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।
- शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि (IWT) के सम्मान और पानी के गैर-हथियारीकरण की मांग की।
- भारत ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के आदेश को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता का बचाव किया है।
- पाकिस्तान 2026-27 के लिए एससीओ की अध्यक्षता संभालेगा, जिसमें AI और IT पर जोर दिया जाएगा।
- अफगानिस्तान की धरती से आतंकवाद खत्म होने तक शांति संभव नहीं होने की चेतावनी दी।
किर्गिस्तान की राजधानी में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय जल विवादों पर तीखा प्रहार किया। शरीफ ने जोर देकर कहा कि पानी इस क्षेत्र की 'जीवन रेखा' है और इसे कभी भी 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के संदर्भ में देखा जा रहा है।
शरीफ ने कहा कि पानी लाखों जिंदगियों का आधार है और इसे किसी भी राजनीतिक लाभ या जबरदस्ती के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है। गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने कड़े राजनयिक और आर्थिक कदम उठाते हुए इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। शरीफ ने तर्क दिया कि साझा जल का प्रबंधन करने वाली संधियाँ पवित्र होती हैं और इन्हें राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदला नहीं जाना चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, शरीफ का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को घेरने की एक सोची-समझी कोशिश है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 'अवैध रूप से गठित' मध्यस्थता न्यायालय के किसी भी आदेश को नहीं मानेगा। यह संघर्ष दर्शाता है कि कैसे जल संसाधन अब दक्षिण एशिया में रणनीतिक युद्ध का नया मोर्चा बन गए हैं, जहाँ पर्यावरणीय मुद्दे भू-राजनीतिक तनाव के नीचे दब गए हैं।
"सिंधु जल संधि का संकट अब केवल तकनीकी विवाद नहीं, बल्कि भारत-पाक संबंधों में गहरे अविश्वास का प्रतीक बन चुका है।"
आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए शरीफ ने दावा किया कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ 90,000 से अधिक जान गंवाई हैं और 150 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान झेला है। हालांकि, उन्होंने अफगानिस्तान की ओर इशारा करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक आतंकी अफगान जमीन का इस्तेमाल करेंगे, तब तक क्षेत्रीय शांति एक सपना बनी रहेगी।
आगामी एससीओ अध्यक्षता (2026-27) की बात करते हुए, शरीफ ने एक व्यापक योजना पेश की। उन्होंने Sovereign AI Infrastructure और गवर्नेंस के लिए एक फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा, ताकि कोई भी सदस्य देश तकनीक की दौड़ में पीछे न रहे। इसके अलावा, उन्होंने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को अरब सागर के माध्यम से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाला मुख्य द्वार बताया।
शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच जून में हस्ताक्षरित 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने संकट के समय एक ईमानदार मध्यस्थ के रूप में कार्य किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता आई है।
| मुद्दा | पाकिस्तान का रुख | भारत का रुख |
|---|---|---|
| सिंधु जल संधि | इसे बिना शर्त माना जाना चाहिए। | आतंकवाद के बाद इसे स्थगित करने का अधिकार। |
| PCA न्यायालय | न्यायालय के माध्यम से समाधान की मांग। | न्यायालय को 'अवैध' और क्षेत्राधिकार-रहित माना। |
| आतंकवाद | अफगान जमीन से संचालित आतंकवाद पर जोर। | पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र मानता है। |
Frequently Asked Questions
1. सिंधु जल संधि क्या है?
यह 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के वितरण के लिए की गई एक संधि है।
2. पाकिस्तान एससीओ में क्या नया प्रस्ताव लाया है?
पाकिस्तान ने सदस्य देशों के लिए एक संप्रभु AI इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने का प्रस्ताव दिया है।