नुवाकोट के त्रिभुवन त्रिशुली सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य ने बाढ़ से पहले छात्रों को खाली कर एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। भारत ने स्कूल के पूर्ण पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया, जिससे दो देशों के बीच सहयोग की नई दिशा खुली।

  • प्रधानाचार्य ने स्कूल को तुरंत खाली किया
  • 1,600 से अधिक छात्रों की जान बची
  • भारत ने स्कूल के पूर्ण पुनर्निर्माण का वादा किया

मुख्य घटनाएँ

भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बिदुर, नुवाकोट में स्थित त्रिभुवन त्रिशुली सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य राजेन्द्र दावाड़ी से मंगलवार को मुलाकात की। उन्होंने अगस्त 26 को आए विनाशकारी बाढ़ के दौरान दावाड़ी के तेज़ निर्णय की सराहना की।

दावाड़ी ने कई चेतावनियों के बाद स्कूल की घंटी बजाकर 1,600 से अधिक छात्रों को ऊँचे स्थान पर ले जाने का आदेश दिया। केवल कुछ ही मिनटों में तेज़ बहती जलधारा ने स्कूल की इमारत को ध्वस्त कर दिया, लेकिन छात्र सुरक्षित रहे।

दावाड़ी ने बीबीसी को बताया, “मैंने और देरी नहीं की, चाहे बाढ़ आ रही हो या नहीं, एक दिन की कक्षा भी नहीं खोनी चाहिए थी।” एक छात्रा, युनीशा, ने कहा, “हम सिर्फ 10 सेकंड के अंतर से बच गए, बाजार हमारे सामने ही बह गया।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

त्रिभुवन त्रिशुली स्कूल की स्थापना 1950 के दशक में भारत की सहायता से हुई थी और इसे त्रिशुली जलविद्युत परियोजना के इंजीनियरों ने डिजाइन किया था। 2022 में भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम (HICDP) के तहत एक नया भवन बनाया गया था। अब वही भवन बाढ़ में बिखर गया है, जिससे भारत‑नेपाल सहयोग की नई कहानी लिखी जा रही है।

भारत ने इस स्कूल को फिर से बनाने के लिए पूर्ण वित्तीय समर्थन का आश्वासन दिया है, जिससे न केवल बुनियादी ढाँचा बल्कि दो देशों के शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि इस कदम से भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ रणनीति को बल मिलेगा और नेपाल में भारत के मानवीय छवि को पुनर्स्थापित करेगा, विशेषकर जलवायु‑प्रेरित आपदाओं के बढ़ते जोखिम के बीच।

“शिक्षा के बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है,” कहा जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अंजु शर्मा।
Did You Know?: त्रिशुली जलविद्युत परियोजना, जो 1970 के दशक में पूरी हुई, ने इस क्षेत्र में भारत‑नेपाल ऊर्जा सहयोग का पहला बड़ा मॉडल स्थापित किया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: पुनर्निर्माण में कितना समय लगेगा?
उत्तर: अनुमानित रूप से दो साल, लेकिन बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में कार्य की गति पर निर्भर करेगा।

प्रश्न 2: क्या सभी छात्रों को फिर से उसी स्कूल में पढ़ाया जाएगा?
उत्तर: हाँ, पुनर्निर्माण के बाद स्कूल पूरी तरह से वही छात्रों को सेवा देगा, साथ ही नई सुविधाएँ भी जोड़ी जाएँगी।