बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता पर जोर दिया। भारत अब मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार और सुरक्षा संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है।
- पीएम मोदी ने बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया, जो संगठन के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
- भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
- ईरान-इजरायल संघर्ष और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत ने क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया।
- मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार और खनिज संसाधनों पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने का लक्ष्य।
किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भागीदारी ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है। यह सम्मेलन संगठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था, जो यूरेशियाई समूह के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाना और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटना था।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। बिश्केक घोषणापत्र में ईरान पर हमलों की निंदा की गई और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकार का समर्थन किया गया। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक क्षण था, क्योंकि भारत को एक तरफ ईरान के साथ संबंधों को संभालना है और दूसरी तरफ BRICS के माध्यम से रूस और चीन के साथ तालमेल बिठाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि SCO में भारत की उपस्थिति केवल एक औपचारिक भागीदारी नहीं है, बल्कि यह मध्य एशिया में अपने प्रभाव को पुनः स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। हाल के वर्षों में अन्य वैश्विक preoccupations के कारण मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ भारत के संबंध थोड़े धीमे पड़े थे, लेकिन व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करके भारत इस खाई को पाटने की कोशिश कर रहा है।
आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मानकों' को समाप्त करना ही SCO की वास्तविक सफलता सुनिश्चित करेगा।
शिखर सम्मेलन के दौरान, पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और कट्टरपंथ के पारिस्थितिकी तंत्र को ध्वस्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से उन देशों को चेतावनी दी जो आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के एक उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करते हैं। यह बयान स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा था, जिससे भारत के सुरक्षा संबंधी concerns की पुष्टि होती है।
वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य काफी जटिल है। एक ओर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और रूस पर प्रतिबंधों ने वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का SCO की अध्यक्षता संभालना भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती पेश करता है। भारत को अब अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों के साथ अपने जुड़ाव को और अधिक व्यापक और गहरा बनाना होगा।
Frequently Asked Questions
1. SCO शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्या था?
इसका मुख्य एजेंडा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, क्षेत्रीय आर्थिक सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना था।
2. भारत ने आतंकवाद पर क्या रुख अपनाया?
भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और सदस्य देशों से आतंकवाद पर 'दोहरे मानक' न अपनाने की अपील की।