अमेरिका की एक संघीय अदालत ने 'बर्थ टूरिज्म' को निशाना बनाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नवीनतम कार्यकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- संघीय न्यायाधीश डेबोरा एल. बोर्डमैन ने ट्रंप के अगस्त 2026 के कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है।
- यह आदेश तथाकथित 'बर्थ टूरिज्म' और कुछ श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता को सीमित करने के लिए लाया गया था।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन सभी को जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है।
अमेरिका में मैरीलैंड की एक संघीय अदालत ने जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) को सीमित करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेबोरा एल. बोर्डमैन ने ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक (Preliminary Injunction) लगा दी है, जिसका उद्देश्य 'बर्थ टूरिज्म' को रोकना था। अदालत के इस फैसले के बाद, जब तक इस मामले में दायर जनहित याचिका का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक यह विवादित नीति लागू नहीं हो सकेगी।
यह पूरा विवाद अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन पर आधारित है, जिसे गृहयुद्ध के बाद 1868 में मंजूरी दी गई थी। न्यायाधीश बोर्डमैन ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा, "सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि प्रमाणित श्रेणी में आने वाले बच्चे जन्म से ही अमेरिकी नागरिक हैं।" इससे पहले जून में भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के एक ऐसे ही कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था, जिसमें अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चों को नागरिकता देने से इनकार किया गया था।
अगस्त में जारी किए गए नए और संकुचित कार्यकारी आदेश में ट्रंप प्रशासन ने कुछ विशिष्ट श्रेणियों के बच्चों को निशाना बनाया था। इसमें विदेशी दूतावासों के कर्मचारियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े लोगों या अमेरिका के "शत्रु एलियन" (Alien Enemy) माने जाने वाले लोगों के बच्चों की स्वचालित नागरिकता को सीमित करने का प्रावधान था। नागरिकता अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों का आरोप है कि प्रशासन ने "शत्रु एलियन" की परिभाषा को बेहद व्यापक और संदिग्ध बना दिया था, जिससे प्रवासी परिवारों में भारी डर का माहौल पैदा हो गया था।
| प्रावधान | जून का कार्यकारी आदेश | अगस्त का कार्यकारी आदेश |
|---|---|---|
| मुख्य लक्ष्य | अवैध और अस्थायी प्रवासियों के बच्चे | दूतावास कर्मी, अंतरराष्ट्रीय संगठन और 'शत्रु एलियन' |
| कानूनी स्थिति | अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज | संघीय अदालत द्वारा अंतरिम रोक |
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी टकराव राष्ट्रपति की शक्तियों और संवैधानिक अधिकारों के बीच की एक बड़ी जंग है। कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या को बदलने का प्रयास करके ट्रंप प्रशासन राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमाओं का परीक्षण कर रहा है। इस मामले का अंतिम परिणाम न केवल अमेरिकी आव्रजन नीति (Immigration Policy) को नया आकार देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या कार्यपालिका अकेले दम पर दशकों पुराने संवैधानिक प्रावधानों को बदल सकती है या नहीं।
"व्हाइट हाउस को यह समझना होगा कि वह बच्चों से उनके नागरिकता के अधिकार को छीनने, अदालती फैसलों से बचने या राष्ट्रपति के प्रवासी-विरोधी एजेंडे को संविधान से ऊपर रखने में कभी सफल नहीं होगा," - शाना खादर, कानूनी निदेशक, वी आर कासा (We Are CASA)।
Historical Background
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता का सिद्धांत, जिसे कानूनी भाषा में 'जस सोली' (Jus Soli) कहा जाता है, सदियों पुराना है। 1898 के ऐतिहासिक मामले यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा, चाहे उसके माता-पिता किसी भी देश के नागरिक हों, जन्म से अमेरिकी नागरिक है। ट्रंप प्रशासन का यह नया आदेश इस स्थापित न्यायिक मिसाल को पलटने का एक और राजनीतिक प्रयास था, जिसे अदालतों ने फिर से खारिज कर दिया है।
Frequently Asked Questions
जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) क्या है?
अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत, अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले लगभग हर बच्चे को स्वचालित रूप से अमेरिका की नागरिकता मिल जाती है, जिसे जन्मजात नागरिकता कहा जाता है।
अदालत ने ट्रंप के आदेश पर रोक क्यों लगाई?
न्यायाधीश डेबोरा एल. बोर्डमैन ने पाया कि यह आदेश संविधान के 14वें संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का उल्लंघन करता है, इसलिए इस पर अंतरिम रोक लगाना जरूरी था।