बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान और रूस के समर्थन में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। यह कदम आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता से पहले भारत की बदलती विदेश नीति का संकेत दे सकता है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन में अमेरिका और इजरायल की आलोचना करने वाले बयान का समर्थन किया।
- भारत की यह स्थिति आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
- यह कदम वैश्विक भू-राजनीति में भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को दर्शाता है।
बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मोड़ देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस आधिकारिक बयान का समर्थन किया है जिसमें ईरान और रूस के संदर्भ में अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों और नीतियों की आलोचना की गई है। यह घटनाक्रम वैश्विक मंच पर भारत की बदलती भूमिका और उसकी विदेश नीति के नए आयामों को रेखांकित करता है।
विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर गहन चर्चा हो रही है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक कूटनीतिक दिशा बदल रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत दिल्ली में आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है और अगले वर्ष पाकिस्तान के पास SCO की अध्यक्षता होगी। भारत का यह रुख रूस और ईरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) की वकालत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत अब केवल पश्चिमी गुट के साथ संरेखित रहने के बजाय अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' का उपयोग कर रहा है। ईरान के साथ ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ रक्षा संबंधों को देखते हुए, SCO के मंच पर इस तरह का रुख भारत को ग्लोबल साउथ (Global South) के नेता के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकता है।
भारत की यह नीति दर्शाती है कि नई दिल्ली अब वैश्विक संघर्षों में किसी एक पक्ष का अंधानुकरण करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगी।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने शीत युद्ध के दौरान गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) की नीति अपनाई थी। वर्तमान परिदृश्य में, यह नीति 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) में बदल गई है, जहाँ भारत एक साथ अमेरिका, रूस और मध्य पूर्व के देशों के साथ गहरे संबंध बनाए रखने में सक्षम है।
आगामी महीनों में, भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए SCO और BRICS जैसे मंचों पर अपनी उपस्थिति को कैसे प्रभावी बनाता है। विशेष रूप से, पाकिस्तान की SCO अध्यक्षता के दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत का रुख अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
Frequently Asked Questions
1. SCO शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था?
यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित किया गया था।
2. भारत के इस कदम का क्या प्रभाव पड़ सकता है?
इससे भारत की वैश्विक दक्षिण (Global South) में पकड़ मजबूत हो सकती है, लेकिन पश्चिम के साथ संबंधों में तनाव की संभावना भी बढ़ सकती है।