नेपाल सरकार ने भोटेकोषी बाढ़ से प्रभावित व्यवसायों के लिए कर और सीमा शुल्क राहत की घोषणा की है, साथ ही विस्थापित समुदायों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • प्रभावित व्यवसायों को नए उपकरण आयात करने के लिए सीमा शुल्क से छूट मिलेगी।
  • नेपाल राष्ट्र बैंक प्रभावित कर्जदारों के ऋण पुनर्गठन की सुविधा प्रदान करेगा।
  • सरकार भोटेकोषी क्षेत्र की 15 नष्ट हुई बस्तियों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना बना रही है।
  • बचाव कार्यों में लगे कर्मियों के लिए विशेष जोखिम भत्ता और सहायता राशि की घोषणा की गई है।

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी भोटेकोषी बाढ़ के बाद, सरकार ने आर्थिक और सामाजिक पुनर्प्राप्ति के लिए एक व्यापक रणनीति पेश की है। कैबिनेट ने गुरुवार को घोषणा की कि व्यवसायों के लिए राहत उपायों का पहला चरण शुरू हो गया है, जिसमें कर रियायतें और सीमा शुल्क में छूट शामिल है। यह कदम उन उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके संयंत्र, मशीनरी और वाहन बाढ़ की लहरों में बह गए हैं।

राहत पैकेज के तहत, जिन कंपनियों के व्यावसायिक वाहन या उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें अगले छह महीनों के भीतर बिना किसी सीमा शुल्क के प्रतिस्थापन उपकरण आयात करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय सरकारों को संपत्ति कर और व्यावसायिक करों में अस्थायी छूट देने का निर्देश दिया गया है। नेपाल राष्ट्र बैंक को भी निर्देश दिया गया है कि वह बाढ़ प्रभावित ऋणधारकों के लिए ऋण पुनर्गठन या पुनर्गठन की प्रक्रिया को सुगम बनाए।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि और छोटे व्यवसायों पर निर्भर है, जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। केवल बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण पर्याप्त नहीं है; आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवित करने के लिए वित्तीय तरलता और कर राहत अनिवार्य है। यदि व्यवसायों को तुरंत सहायता नहीं मिली, तो क्षेत्र में दीर्घकालिक बेरोजगारी और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।

भविष्य की आपदाओं से बचने के लिए केवल पुनर्निर्माण ही काफी नहीं है, बल्कि हमें जोखिम वाले क्षेत्रों से आबादी को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की आवश्यकता है।

पुनर्वास के मोर्चे पर, राष्ट्रीय योजना आयोग उन समुदायों के लिए एक मास्टर प्लान तैयार कर रहा है जिनकी बस्तियां त्रिशूली नदी के किनारे बह गईं। रासुवा, नुवाकोट और धाding जिलों में लगभग 15 बस्तियां पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य इन लोगों को बाढ़-जोखिम वाले क्षेत्रों से हटाकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर बसाना है।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, इस आपदा ने लगभग 1.6 मिलियन लोगों को सीधे प्रभावित किया है और 8,317 घर नष्ट हो गए हैं। वर्तमान में, हजारों लोग अस्थायी आश्रय केंद्रों में रह रहे हैं, जबकि सरकार सुरक्षित स्थानों की पहचान करने के लिए टीमों को तैनात कर रही है।

Did You Know?: नेपाल में 1993 की बाढ़ और 2015 के भूकंप के बाद भी सरकार ने आपदा प्रभावित समुदायों को सफलतापूर्वक पुनर्व्यवस्थित किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्रभावित व्यवसायों को किस प्रकार की वित्तीय राहत दी जा रही है?
उत्तर: व्यवसायों को सीमा शुल्क से छूट, संपत्ति कर में रियायत और बैंकों के माध्यम से ऋण पुनर्गठन की सुविधा दी जा रही है।

प्रश्न 2: क्या सरकार विस्थापित लोगों के लिए नए घर बनाएगी?
उत्तर: हाँ, सरकार का लक्ष्य जोखिम वाले क्षेत्रों से आबादी को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर नई बस्तियां स्थापित करना है।