नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में लापता हुए लोगों की पहचान के लिए भारत सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब पीड़ित परिवारों के करीबी रिश्तेदार भारत की लैब में DNA सैंपल जमा कर सकेंगे ताकि अज्ञात शवों की पहचान की जा सके।
- नेपाल बाढ़ में 1,259 मौतें और 5,000 लोग लापता हैं।
- भारत में रहने वाले प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदारों का DNA प्रोफाइल तैयार किया जाएगा।
- CFSL, SFSL और NABL मान्यता प्राप्त लैब में यह सुविधा उपलब्ध होगी।
- DNA प्रोफाइल का मिलान नेपाल पुलिस द्वारा किया जाएगा।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने पूरे क्षेत्र में तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,259 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं। अपनों को खो चुके परिवारों के लिए भारत सरकार ने एक मानवीय पहल करते हुए DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया को सुगम बनाने का निर्णय लिया है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, भारत में रह रहे लापता लोगों के 'फर्स्ट-डिग्री' जैविक रिश्तेदारों—जैसे माता-पिता, बच्चे और भाई-बहन—के DNA सैंपल लिए जाएंगे। इन प्रोफाइल्स का उपयोग नेपाल में मिले अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए किया जाएगा। यह कदम उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण है जो महीनों से अपने परिजनों का कोई सुराग नहीं पा सके हैं।
तकनीकी प्रक्रिया और लैब की उपलब्धता
DNA प्रोफाइलिंग की यह प्रक्रिया अत्यंत उच्च तकनीकी मानकों के साथ संचालित की जाएगी। भारत की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL), राज्य स्तरीय फॉरेंसिक लैब (SFSL), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी और NABL से मान्यता प्राप्त लैब्स इस कार्य में सहयोग करेंगी। नेपाल पुलिस की सलाह पर Autosomal STR DNA profiling का उपयोग किया जाएगा, जो पहचान के लिए सबसे सटीक माना जाता है।
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत द्वारा DNA प्रोफाइलिंग की सुविधा प्रदान करना न केवल तकनीकी सहयोग है, बल्कि एक गहरा मानवीय दृष्टिकोण भी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सीमावर्ती देशों के बीच आपदा प्रबंधन में तकनीकी समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। नेपाल और भारत के बीच भौगोलिक निकटता और साझा आबादी के कारण, इस तरह की आपदाओं में पहचान की समस्या वैश्विक स्तर पर एक चुनौती होती है। भारत की यह पहल द्विपक्षीय संबंधों में आपदा राहत के एक नए मानक स्थापित करती है।
नेपाल पुलिस ने पहचान प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक समर्पित ईमेल ([email protected]) भी जारी किया है। इसके अतिरिक्त, समन्वय के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास का ईमेल ([email protected]) भी उपलब्ध कराया गया है। सहायता के लिए नेपाल पुलिस का हेल्पलाइन नंबर +977 9841 6160 95 भी सक्रिय है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नेपाल में हालिया आपदा का मुख्य कारण 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुआ हिमस्खलन (Avalanche) था। बर्फ और चट्टानों के अचानक गिरने से आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों को पूरी तरह से मलबे में दबा दिया, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कौन से रिश्तेदार DNA सैंपल दे सकते हैं?
उत्तर: केवल प्रथम श्रेणी के जैविक रिश्तेदार जैसे माता-पिता, संतान और भाई-बहन ही सैंपल दे सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या यह प्रक्रिया मुफ्त है?
उत्तर: सरकार द्वारा आपदा राहत के तहत समन्वय किया जा रहा है, विस्तृत जानकारी के लिए स्थानीय दूतावास से संपर्क करें।