नेपाल के नुवाकोट में त्रिशूली नदी के भीषण सैलाब में भारत की सहायता से बना स्कूल बह गया, लेकिन प्रिंसिपल की सूझबूझ से 1,600 से अधिक बच्चों की जान बच गई। भारत ने इस स्कूल को फिर से बनाने का संकल्प लिया है।

  • प्रिंसिपल राजेंद्र दावादी की त्वरित कार्रवाई से 1,643 बच्चों की जान बच गई।
  • भारत द्वारा 2022 में निर्मित त्रिविम त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय बाढ़ में बह गया।
  • भारत सरकार ने स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए पूर्ण सहायता का वादा किया है।
  • लंगटांग लिरुंग चोटी पर हिमस्खलन के कारण यह भीषण बाढ़ आई थी।

नेपाल के नुवाकोट जिले से एक हृदयविदारक लेकिन वीरतापूर्ण कहानी सामने आई है। भीषण बाढ़ और त्रिशूली नदी के उफान ने जहाँ भारी तबाही मचाई, वहीं त्रिविम त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल राजेंद्र दावादी की तत्परता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। दावादी ने समय रहते खतरे को भांपते हुए स्कूल की घंटी बजाई और 1,600 से अधिक बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया, जिससे उनकी जान बच गई।

दुर्भाग्यवश, जिस स्कूल को भारत की मदद से 1951 में स्थापित किया गया था और जिसे 2022 में 'हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स' (HICDP) के तहत भारत द्वारा पुनर्गठित किया गया था, वह नदी के प्रचंड वेग में बह गया। तीन मंजिला कंक्रीट का यह मजबूत ढांचा, जो नदी से 60 मीटर ऊपर स्थित था, प्रकृति के रौद्र रूप के सामने टिक नहीं सका।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच गहरे सांस्कृतिक और विकासपरक संबंधों का प्रतीक है। भारत द्वारा इस स्कूल का बार-बार पुनर्निर्माण करना दोनों देशों के बीच 'पड़ोसी प्रथम' नीति और मानवीय सहायता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

"प्रिंसिपल दावादी की त्वरित कार्रवाई ने त्रिशूली की विनाशकारी बाढ़ के बीच 1,600 से अधिक मासूम जिंदगियों को बचा लिया।" - भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव

इस आपदा का मुख्य कारण तिब्बत सीमा के पास लंगटांग लिरुंग चोटी से बर्फ और चट्टानों का भारी मात्रा में गिरना था। इस हिमस्खलन ने ल्हेंडे खोला नदी में भारी तबाही मचाई, जिससे त्रिशूली घाटी में अचानक बाढ़ (Flash Flood) आ गई। इस आपदा में स्कूल के दो कर्मचारी, संतोष परियार और सुल्तान लामा, अपनी जान गंवा बैठे।

भारत ने इस संकट की घड़ी में नेपाल का साथ देने के लिए भारतीय वायुसेना के माध्यम से 21 टन सहायता सामग्री, राहत दल और फॉरेंसिक टीमें भेजी हैं। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने स्कूल के प्रधानाचार्य से मुलाकात कर आश्वासन दिया कि भारत इस विद्यालय को फिर से खड़ा करने में पूरी मदद करेगा।

Did You Know?: त्रिविम त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय का मूल डिजाइन एक भारतीय इंजीनियर ने तैयार किया था, जो त्रिशूली हाइड्रोपावर प्लांट के निर्माण में भी शामिल थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: स्कूल को भारत ने कब और क्यों बनाया था?
उत्तर: स्कूल की स्थापना 1951 में भारतीय सहायता से हुई थी और 2022 में भारत के HICDP कार्यक्रम के तहत इसे आधुनिक रूप दिया गया था।

प्रश्न 2: बाढ़ का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: लंगटांग लिरुंग चोटी पर बर्फ और चट्टानों के गिरने (हिमस्खलन) के कारण त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आई थी।