चीन ने नेपाल-चीन सीमा पर आए विनाशकारी बाढ़ के बावजूद ब्रह्मपुत्र (यारलुंग ज़ंगबो) नदी पर अपनी महत्वाकांक्षी मेगा डैम परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। यह परियोजना चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा है और भारत के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा करती है।
- चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर 'सदी की परियोजना' के रूप में एक विशाल बांध बना रहा है।
- इस परियोजना का अनुमानित निवेश 1.2 ट्रिलियन युआन (लगभग ₹14 लाख करोड़) है।
- यह बांध थ्री गोरजेस डैम से तीन गुना अधिक बिजली पैदा करने में सक्षम होगा।
- भारत को नदी के प्रवाह और पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ने वाले प्रभाव की चिंता है।
चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में यारलुंग ज़ंगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले इलाकों में अपनी मेगा डैम परियोजना को जारी रखेगा। हाल ही में नेपाल-चीन सीमा पर आए विनाशकारी ग्लेशियर टूटने और बाढ़ की घटनाओं के बावजूद, बीजिंग अपनी ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में इस परियोजना को नवीकरणीय ऊर्जा के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है।
चीन के उप प्रधानमंत्री झांग गुओकिंग ने हाल ही में निंगची का दौरा किया और इस परियोजना को एक 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता देगी। जुलाई 2025 में, चीनी प्रीमियर ली कियांग ने इसे 'सदी की परियोजना' करार देते हुए इसके निर्माण की घोषणा की थी। इस विशालकाय प्रोजेक्ट के लिए कुल 1.2 ट्रिलियन युआन का निवेश आवंटित किया गया है, जिसका उद्देश्य पांच बिजली स्टेशनों का निर्माण करना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना केवल ऊर्जा उत्पादन के बारे में नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक नियंत्रण के बारे में भी है। ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए जीवन रेखा है। चीन द्वारा पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता भारत के लिए जल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
यह परियोजना न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में चीन की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि निचले प्रवाह वाले देशों के लिए एक रणनीतिक हथियार भी बन सकती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना की स्थापित क्षमता 60 GW तक हो सकती है, जो दुनिया के सबसे बड़े बांध, थ्री गोरजेस डैम की क्षमता से तीन गुना अधिक है। यह एक 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना होने का दावा किया गया है, लेकिन इसमें एक विशाल जलाशय भी शामिल होगा। विश्लेषणों से संकेत मिलता है कि पानी को एक 40 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा, जो नदी के प्राकृतिक मार्ग को बदल सकता है।
भारत के लिए मुख्य चिंता का विषय जलाशय में पानी का भंडारण और सुरंग के कारण निचले प्रवाह में होने वाला बदलाव है। भारत और चीन के बीच सीमा पार नदियों पर विशेषज्ञ तंत्र (Expert-Level Mechanism) की बैठक होने वाली है, लेकिन हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने में पारदर्शिता की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
Frequently Asked Questions
1. यह बांध भारत के लिए क्यों चिंताजनक है?
क्योंकि यह ब्रह्मपुत्र के पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ या सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है।
2. इस परियोजना की लागत कितनी है?
चीनी सरकार ने इस परियोजना के लिए लगभग 1.2 ट्रिलियन युआन (₹14 लाख करोड़) के निवेश की घोषणा की है।