डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने तीसरे देश में निर्वासन (third-country deportation) की नीति को तेज करते हुए क्यूबा और अफगानिस्तान के प्रवासियों को गयाना भेज दिया है। यह कदम अमेरिका की नई सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा है।
- अमेरिका ने क्यूबा और अफगानिस्तान के नागरिकों को गयाना में निर्वासित किया।
- गयाना के विदेश सचिव रॉबर्ट परसॉड ने इस समझौते की पुष्टि की है।
- ट्रंप प्रशासन ने अब तक 30 से अधिक देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं।
- निर्वासित किए गए व्यक्तियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने अपनी सख्त आव्रजन नीतियों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए 'थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन' (तीसरे देश में निर्वासन) की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। हाल ही में, गयाना के विदेश सचिव रॉबर्ट परसॉड ने पुष्टि की है कि क्यूबा और अफगानिस्तान के नागरिक, जिन्हें अमेरिका से निर्वासित किया गया था, शनिवार को दक्षिण अमेरिकी देश गयाना पहुंचे।
यह कदम ट्रंप के उस चुनावी वादे का हिस्सा है जिसमें उन्होंने अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा निर्वासन कार्यक्रम चलाने का संकल्प लिया था। गयाना के अधिकारियों के अनुसार, ये प्रवासी किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि से नहीं जुड़े हैं, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि निर्वासन का दायरा अब केवल अपराधियों तक सीमित नहीं रह गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटनाक्रम वैश्विक आव्रजन राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। तीसरे देश में निर्वासन का अर्थ है ऐसे लोगों को उनके मूल देश के बजाय किसी तीसरे देश में भेजना, जिनसे अक्सर उस नए देश की भाषा या संस्कृति का कोई संबंध नहीं होता। यह नीति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के बीच भारी विवाद का विषय बनी हुई है।
तीसरे देश में निर्वासन की नीति प्रवासियों को मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ने और उन्हें कानूनी दावों को छोड़ने के लिए मजबूर करने का एक उपकरण बन सकती है।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल के अनुमानों के अनुसार, ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से अब तक 30 से अधिक देशों के साथ ऐसे समझौते किए जा चुके हैं, जिनमें से 15 समझौते अमेरिका के पश्चिमी गोलार्ध (Americas) क्षेत्र में हुए हैं। गयाना के साथ यह समझौता केवल एक वर्ष के लिए है और यह स्थायी पुनर्वास नहीं है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, निर्वासन प्रक्रिया में व्यक्ति को उसके मूल देश वापस भेजा जाता था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने 'ट्रांजिट' या 'थर्ड-कंट्री' मॉडल को बढ़ावा दिया है, जहाँ अमेरिका उन देशों को भुगतान करता है या उनके साथ समझौते करता है जो प्रवासियों को स्वीकार करने के लिए तैयार होते हैं। यह रणनीति उन देशों को लक्षित करती है जो क्यूबा जैसे प्रवासियों को वापस लेने से इनकार कर देते हैं।
Frequently Asked Questions
1. 'थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन' क्या है?
इसका अर्थ है किसी विदेशी नागरिक को उसके मूल देश के बजाय किसी अन्य देश में भेजना, जिसके साथ उसका कोई सीधा संबंध नहीं है।
2. गयाना में इन प्रवासियों को क्या सहायता मिलेगी?
संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के माध्यम से उन्हें 'असिस्टेड वॉलंटरी रिटर्न प्रोग्राम' के तहत संसाधन प्रदान किए जाएंगे।